Political Protests and National Identity
जिस देश की सरकार को उसी देश के ही एक public park में उसी देश के कुछ
युवाओं के द्वारा उसी देश के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को फहराने से खतरा
महसूस होने लगे और हजारों की संख्या में police लगाकर उन युवाओं को
detain किया जाने लगे तो वह तिरंगा फहराना और भी जरूरी हो जाता है। कर लो
detain। इन लोगों ने जब CPJ के सौरभ दास और आशुतोष रंका को arrest किया तब तो
यह बोल दिया कि हमने इनको तिरंगा फहराने नहीं बल्कि बिना permission के JDU के
office में घुसकर जंतर मंतर में entry करने के लिए arrest कर पांच दिन के लिए
जेल भेज दिया। ठीक बात, पर आज तो ये सब लोग अकेले अकेले ही अपने
हाथों में
तिरंगा लेकर एक public park की तरफ निकले थे ना और इनको तिरंगा फहराने से रोकने
के लिए तो High Court और Supreme Court ने भी मना कर दिया था। तो फिर इन्हें illegally
detain करने का आज क्या logic है तुम्हारे पास। यह जो तुम बार बार बोल रहे हो ना कि हम
इस देश को नेपाल और बांग्लादेश नहीं बनने देंगे,
पर काम तुम exactly वही सब कर रहे हो।
नेपाल के युवाओं के सड़कों पर आने का trigger point था वहां की सरकार का social
media
ban और जिस speed से इस देश में internet, लोगों के accounts और उनके content उड़ाए जा
रहे हैं ना, तो इस देश को नेपाल कौन सरकार बना रही है,
वह युवा।
Exactly ऐसे ही बांग्लादेश के युवाओं के सड़कों पर उतरने का सबसे बड़ा कारण वहां के
चुनावों में की गई धांधली थी। पिछले कई सालों से इस देश के चुनाव आयोग पर भी धांधली
के आरोप लगते आ रहे हैं। Indian Express की report आने के बाद तो चुनाव आयोग एक press
conference तक करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। दिनों दिन हो रहे खुलासों से इस
देश के चुनावों के ऊपर शक गहराता जा रहा है और चुनाव आयोग से सवाल करने की जगह
इस देश की ruling party पूरी तरीके से उनके बचाव में उतर आई है। तो
इस देश को बांग्लादेश सरकार बना रही है, इस देश के युवा और उसके ऊपर से ऐसी
ऐसी हरकतें कि इस बार रामलीला मैदान में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के साथ साथ
cockroach का भी पुतला जलाया जाएगा। अब अगर इससे inspiration लेकर इस दशहरे में पूरे
देश के लोग छप्पन inch के छोटे बंदर का पुतला फूंकने लग गए तो फिर cultural shock
लग
जाएगा और रोते रोते reel बनाने लगेंगे।
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