Life Lessons from Campus Experience
साथियों,
मैं लाइफ की कुछ प्रैक्टिकल बातें भी आपसे शेयर करना चाहता हूँ।
कैंपस का जीवन
और कैंपस के बाहर का जीवन,
इन दोनों में
एक बहुत बड़ा अंतर होता है।
IIT की परीक्षा में सिलेबस होता है,
लेकिन जिंदगी की परीक्षा में सब कुछ
आउट ऑफ सिलेबस होता है।
आप याद करिए,
कैंपस लाइफ में
सारे फंडे क्लियर होते थे।
क्या पढ़ना है,
कौन सा असाइनमेंट पूरा करना है,
कौन सी परीक्षा देनी है,
सब पहले से तय होता था।
लेकिन जिंदगी
कुछ अलग तरह से चलती है।
वहाँ न कोई तय कोर्स होता है,
न कोई क्वेश्चन पेपर होता है।
कई बार तो
यह भी कोई नहीं बताता
कि असली सवाल क्या था।
वो सवाल भी आपको खुद पहचानना पड़ता है।
मैंने IIT के
अनेक एलुमनाई की यात्रा को देखा है।
उनकी सक्सेस का कारण
सिर्फ यह नहीं था
कि उन्होंने सही जवाब दिए।
उनकी सक्सेस का कारण यह था
कि उन्होंने
वो सवाल पहचाने
जिन्हें दुनिया ने सवाल मानना ही छोड़ दिया था।
उन्होंने
उन समस्याओं का समाधान खोजा
जिनके साथ बाकी लोग समझौते कर चुके थे।
और इसलिए
लाइफ में
क्यूरियोसिटी बनाए रखिए।
अपनी लर्निंग इंस्टिंक्ट को जलाए रखिए, जगाए रखिए।
चेतना बनाए रखिए।
जो बातें बिना सोचे-समझे स्वीकार कर ली जाती हैं,
जरा उन्हें परखिए।
उन पर सवाल उठाइए।
लेकिन सिर्फ सवाल पूछकर मत रुकिए,
उनका समाधान खोजने का साहस भी रखिए।
यही सोच
आपकी अलग पहचान बनाएगी।
End of transcript · 234 words