Police Violence and Protest Analysis
पुलिस पर किसी भी तरह से हाथ उठाना या मारपीट करना बिल्कुल गलत है और यह किसी
भी प्रदर्शनकारी को नहीं करना चाहिए। लेकिन जो हमारे एक पुलिसकर्मी
कांस्टेबल अंकित कसाना साहब इनके साथ इत्तेफाक इतने ज्यादा हो रहे हैं कि
इनकी बात पर भी शक होने लगता है।
मेरा कसूर क्या है कि वर्दी पहनना हमारा कसूर है। हम इस
देश की सेवा में लगे हैं। हमारा कसूर है।
पहला इत्तेफाक यह होता है कि जो 20 जुलाई का protest था उसमें भी जिस पुलिस वाले को
पीटा गया था कथित तौर पर या जिसके साथ मारपीट की गई थी वो भी यही व्यक्ति
थे। अब अक्टूबर में जब protest हो रहा है तो जिस पुलिस कांस्टेबल को पीटा गया है कथित
तौर पर वो भी यही व्यक्ति है। ये दोनों व्यक्ति same है। जिस व्यक्ति को दो
महीने पहले पीटा गया था उसकी नाक और सर पर चोट थी। वो चोट दो महीने के भीतर ठीक
हो गई और उसने वापस service शुरू कर दी। लेकिन service शुरू करते ही उसे दोबारा
पीट दिया गया। अब इस video में ध्यान से देखिए इन कांस्टेबल साहब
की shirt का button टूटा नहीं है लेकिन फिर भी button खुला हुआ है और ये बताया जा
रहा है कि इनके साथ मारपीट की गई है। इनकी वर्दी फाड़ी गई है। चलो ठीक है एक और
video देखते हैं। ये इनका video है जब ये civil dress में पत्रकारों के साथ धक्का
मुक्की करते हुए उन्हें बाहर कर रहे हैं जो काम इनको officially नहीं दिया जाता है।
किसी भी पुलिस वाले को official order में यह नहीं कहा जाता कि पत्रकारों को धक्का मार
के बाहर करो। यह काम ये अभिनव के साथ कर रहे थे जो News Bench के reporter हैं। उसके
बाद जब इनका नाम बाहर आया तो यह भी पता चला कि इनके ऊपर तो पहले भी एक आपराधिक मामला
दर्ज हो चुका है जिसकी वजह से इन्हें suspend भी किया गया था और इनके ऊपर जांच भी
बैठी थी। जो मामला कहीं ना कहीं पैसों के हेरफेर से जुड़ा हुआ भी था।
हालांकि इस मामले में आगे क्या हुआ यह नहीं पता और ये वापस service पर आ गए हैं। अब
सवाल सीधा सा है कि क्या दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल के साथ सच में मारपीट
की गई है और अगर सच में मारपीट नहीं की गई है तो पुलिस ये किस तरीके का crisis
management program चला रही है जिसमें पुलिस अपनी छवि को सुधारने के लिए
छात्रों को पीटने के बाद ये खुद बता रही है कि प्रदर्शनकारी पुलिस को पीट रहे हैं।
सवाल सीधा सा है अगर इनके साथ अभद्रता हुई है तो जिसने भी की है उसे
गिरफ्तार किया जाना चाहिए। पुलिस के पास CCTV record है, cameras हैं। पुलिस
कार्यवाही क्यों नहीं कर रही है और छात्रों के साथ जो बर्बरता हुई है उसके record है।
फिर भी पुलिस पर कार्यवाही नहीं हो रही है तो दोनों मामलों में पुलिस video video खेल
रही है लेकिन कार्यवाही के नाम पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। मेरी पुलिस से
demand है कि उस व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाए जिसने इस कांस्टेबल को बुरी तरह से पीटा
है और अगर नहीं किया जा रहा है तो कम से कम इस conspiracy को थोड़ी देर के लिए रोका
जाए।
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