Impact of Ethanol Production on Water Resources
इथेनॉल से तुम्हारी गाड़ी की एवरेज कम हो गई और पार्ट्स खराब हो रहे हैं इसकी तुम्हें बहुत चिंता है,
बट इथेनॉल से जो तुम्हारी जान की कुर्बानी दी जा रही है उसकी तुम्हें कोई चिंता नहीं है।
पूरी बात समझाता हूँ वीडियो एंड तक देख के फिर डिसाइड करना कि तुम्हारी गाड़ी ज़्यादा कीमती है या तुम्हारी जान।
गवर्नमेंट बहुत खुश है E20, E85, फिर E100 भी अकंप्लिश हो रहा है।
इथेनॉल ब्लेंडिंग टारगेट अचीव हो गया है अहेड ऑफ़ शेड्यूल।
लेकिन ये इथेनॉल आया कहाँ से? और इसके लिए आपने क्या कीमत चुकाई है?
इथेनॉल बनाने के लिए दो चीज़ें चाहिए।
पहला है फ़ूड क्रॉप्स - शुगरकेन, राइस, मेज़ वगैरह,
और दूसरा है पानी, बहुत ज़्यादा पानी।
कितना पानी? गवर्नमेंट के अपने डेटा के हिसाब से,
एक लीटर इथेनॉल बनाने के लिए अगर राइस यूज़ करें तो 10,790 लीटर पानी चाहिए,
शुगरकेन यूज़ करें तो 3,630 लीटर पानी चाहिए।
एक लीटर फ्यूल के लिए हज़ारों लीटर पानी लग रहा है।
ये पानी आ कहाँ से रहा है? ज़मीन के नीचे से, ग्राउंड वॉटर पानी।
और ये डिस्टिलरीज़ कहाँ बनी हुई हैं जहाँ पर इथेनॉल बन रहा है?
उसी जगह जहाँ ग्राउंड वॉटर पहले से खत्म हो रहा है,
क्योंकि क्रॉप्स वहाँ ज़्यादा उगती हैं और क्रॉप्स वहीं पर ज़्यादा उगती हैं
जहाँ पानी ज़्यादा निकाला जा सकता है।
एग्जांपल की बात करें तो पंजाब में,
ग्राउंड वॉटर एक्सट्रैक्शन अपनी रिचार्ज कैपेसिटी का 156% है,
मतलब जो पानी धरती में वापस जाता है उससे 56% ज़्यादा हम निकाल रहे हैं हर साल।
और गवर्नमेंट ने एक भी डिस्टिलरी के लिए वॉटर स्ट्रेस मैपिंग नहीं की है,
कोई ऑडिट नहीं, कोई चेक नहीं।
अब रिज़ल्ट देखो। नीति आयोग खुद कह रहा है
2030 तक इंडिया की 21 मेजर सिटीज़ ग्राउंड वॉटर से खाली हो जाएँगी।
दिल्ली, बैंगलोर, मुंबई दोनों लिस्ट में हैं।
और अभी भी दो लाख लोग हर साल सिर्फ इसलिए मर रहे हैं क्योंकि उन्हें सेफ़ ड्रिंकिंग वॉटर नहीं मिलता।
सोचो, इथेनॉल के लिए हमारा खाना भी गया और हमारा पानी भी जा रहा है पेट्रोल में।
20% इथेनॉल तो मिला लिया भाई, लेकिन पानी का क्या करोगे तुम?
पानी ज़्यादा कीमती है या इथेनॉल, कमेंट करके बताओ मुझे।
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