Concerns Over PFAS Production in India
इंडिया में एक ऐसी कहानी चल रही है जिसमें जहर को कानून से ऊपर रखा जा रहा है।
इटली के विसेंज़ा शहर में एक कंपनी थी मितेनी।
यहाँ बनाया जाता था PFAS, जिसे दुनिया फॉरएवर केमिकल कहती है।
क्योंकि ये कभी ख़त्म नहीं होता, ना शरीर में, ना पानी में, ना ज़मीन में।
सेफ्टी स्टैंडर्ड के हिसाब से इंसान के शरीर में इसकी लिमिट है सिर्फ 8 नैनोग्राम।
लेकिन उस फैक्ट्री में काम करने वाले लोगों की बॉडी में
91,900 नैनोग्राम तक PFAS पाया गया।
सोचिए, 8 की जगह 90,000।
इस एक ज़हर से 3.5 लाख लोग बीमार हुए।
इटली जागा और वहाँ की फैक्ट्री बंद हुई, ज़िम्मेदार लोग जेल गए।
कहानी यहीं ख़त्म नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन यहीं से असली कहानी शुरू होती है।
फैक्ट्री बंद तो हो गई, लेकिन उसकी मशीनें ऑक्शन में चली गईं।
और उन मशीनों को खरीदा सिर्फ एक नाम ने, वाव लाइफ साइंस, और ये कंपनी जुड़ी है लक्ष्मी ऑर्गेनिक्स से।
अब वही मशीनें, वही टेक्नोलॉजी और वही ज़हर लगाया जा रहा है रत्नागिरी में।
और सबसे डरावनी बात, कंपनी खुलेआम कह रही है, हाँ, हम वही इटली वाला PFAS बनाएंगे।
यूरोप में जो केमिकल 3.5 लाख लोगों को बीमार करके बैन हो गया,
वही इंडिया में कानूनी तौर पर बनाया जाएगा।
क्यों? क्योंकि इंडिया में PFAS को रेगुलेट करने के लिए कोई कानून ही नहीं है।
मतलब, यहाँ ज़हर बनाना जुर्म नहीं है, यहाँ ज़हर बेचना भी जुर्म नहीं है।
यहाँ ज़हर पीना हमारी किस्मत है।
सवाल सिर्फ एक है, क्या हमारी जिंदगी इतनी सस्ती है?
अगर आज आप चुप रहे, तो कल यही ज़हर आपके पानी में होगा, आपके खाने में होगा और आपके खून में होगा।
तब कहने को कुछ नहीं बचेगा।
इसलिए ये वीडियो ट्रेंड के लिए नहीं है, ये वीडियो सर्वाइवल के लिए है।
शेयर करो, सवाल उठाओ, क्योंकि अगर आज आवाज़ नहीं उठी, तो कल तो बहुत देर हो जाएगी।
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