Prime Minister Receives Controversial Award
देश के प्रधानमंत्री को एक नया सम्मान मिला है, सम्मान का नाम है गार्जियन ऑफ ब्लू ओशियन।
मजेदार बात यह है कि इस सम्मान की शुरुआत 24 जून 2026 को हुई
और 28 जून 2026 को ही प्रधानमंत्री को सम्मान मिल गया।
यानी प्रधानमंत्री के वहां पहुंचने से चार दिन पहले ही यह सम्मान शुरू हुआ है।
प्रधानमंत्री का दौरा तो महीनों पहले प्लान हो जाता है,
यानी प्रधानमंत्री के पहुंचने के बाद एक नए पुरस्कार का आविष्कार किया गया जो उन्हें दिया जा सके
और वो पुरस्कार पाने वाले वो पहले प्रधानमंत्री बन जाएंगे।
अब बड़ा सवाल यह है कि उसके भीतर कुछ स्पेलिंग मिस्टेक्स निकल आई हैं और वो बड़ी ही रोमांचक हैं।
जैसे उस पुरस्कार के भीतर रिपब्लिक की स्पेलिंग गलत लिखी हुई है
और जिस देश ने वो पुरस्कार दिया है, उस देश की स्पेलिंग भी गलत लिखी हुई है।
यानी उन्हें पता था कि प्रधानमंत्री मोदी स्पेलिंग नहीं पढ़ पाएंगे।
मगर मसला सिर्फ स्पेलिंग का नहीं है।
यह पुरस्कार दिया क्यों गया है?
यह पुरस्कार दिया गया है उनके जलवायु परिवर्तन के खिलाफ जो उन्होंने मजबूत कदम उठाए हैं, उनको देखते हुए।
अब जरा उनके इस काम को इंडिया में भी जज कर लेते हैं और उसका फैक्ट चेक करते हैं।
अगर प्रधानमंत्री मोदी के 10 साल के कार्यकाल को इंडिया में देखते हैं तो इन 10 सालों में लगभग
1.6 करोड़ पेड़ काट दिए गए हैं
और यह उनका जलवायु परिवर्तन के लिए भारत में योगदान है।
उसके साथ ही साथ अगर आप अनुमान लगाएंगे तो लगभग 1.73 लाख हेक्टेयर
वन उपयोगी भूमि को कॉर्पोरेट और अन्य तरीके के कामों के लिए दे दिया गया
और उसे वन्य भूमि समझा ही नहीं गया।
पिछले 10 साल में जितने पेड़ कटे हैं, जितने जंगल तबाह हुए हैं,
अगर उनका हिसाब मांगा जाए तो यह पुरस्कार उनसे वापस ले लिया जाएगा।
जिस तरह से अंडमान निकोबार को बर्बाद किया जा रहा है,
जिस तरह से खनन की भेंट झारखंड और छत्तीसगढ़ के बड़े-बड़े जंगल चढ़ रहे हैं,
जिस तरह से बिहार में लाखों पेड़ काटे गए हैं,
इस सब का अगर हिसाब मांग लिया जाए तो प्रधानमंत्री को यह पुरस्कार वापस करना पड़ जाएगा।
End of transcript · 359 words