The Importance of Family Values

ईश्वर की मूर्ति बनाने वाला एक दिन ईश्वर से कहता है,

"हे ईश्वर! तू भी कलाकार है, मैं भी कलाकार

हूं। तूने मुझ जैसे असंख्य पुतले बनाकर इस धरती

पर भेजे हैं और मैंने तुझ जैसे असंख्य पुतले बनाकर

इस धरती पर भेजे हैं। लेकिन उस वक्त शर्म

आती है जब तेरे बनाए हुए पुतले आपस में लड़ाई

करते हैं और मेरे बनाए हुए पुतलों के आगे शीश

झुकाते हैं।" कितनी सोचने वाली बात है। अक्सर

ऐसी गलती हमसे भी हो जाती है।

हम मंदिर में जाकर हमारी बनाई हुई मूर्तियों के तो

दर्शन कर लेते हैं, लेकिन हमारे परिवार में

भगवान की बनाई हुई मूर्तियों के दर्शन नहीं करते। जैसे

हमारे माता-पिता जिन्होंने हमें बनाया है।

so, शिक्षा से पहले संस्कार, व्यापार से पहले

व्यवहार और अगर भगवान से पहले माता-पिता को

रखो तो जीवन की हर कठिनाइयों से पार चले जाओ।

End of transcript · 145 words

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