Corruption Crackdown in Maharashtra FDA
एक जज ने सिर्फ एक सवाल पूछा और अगले ही दिन खुद हाई कोर्ट के दरवाजे पे रेड हो गई।
नाम है तुकाराम मुंढे। 21 साल की सर्विस और 25 ट्रांसफर।
हर बार जब पावर के खिलाफ खड़े हुए, सिस्टम ने इन्हें उठाया और कहीं और फेंक दिया। ये कोई कहानी नहीं, ये इनकी जिंदगी है।
मई 2024, इन्हें दी गई महाराष्ट्र FDA की कमान।
और जिस दिन से इन्होंने कुर्सी संभाली, पूरे स्टेट में हड़कंप मच गया।
दो महीनों के अंदर 1,131 छापे। हर दिन कहीं ना कहीं दरवाजे खटखटाए गए।
50 करोड़ का फूड जब्त, जिसमें डेढ़ लाख लीटर मिल्क था जो अडल्ट्रेटेड निकला।
मिल्क कलेक्टर्स इस कदर डरे कि रातों-रात सड़कों पे अपना ही माल डंपिंग करने लगे।
359 लोग अरेस्ट, 274 एस्टैब्लिशमेंट सील।
कई किचन में मिले मरे हुए चूहे और बगल में ही खाना पक रहा था।
फिर आया वो दिन, बॉम्बे हाई कोर्ट ने खुद सवाल उठा दिया।
सिर्फ प्राइवेट ईटरीज ही क्यों? सरकारी कैंटीन्स क्यों बच रही हैं?
अगली ही सुबह एक टीम हाई कोर्ट के अंदर ही घुस गई।
रिजल्ट? एक कैंटीन का लाइसेंस ही नहीं था। स्टॉप बिजनेस ऑर्डर थमा दिया गया।
खुद हाई कोर्ट के परिसर में।
अब सोचने वाली बात ये है, अगर ऐसे सिर्फ 100 ऑफिसर और मिल जाएं इस देश को, तो सिचुएशन हमेशा के लिए बदल जाए।
ऐसे ऑफिसर की कहानी हर उस इंसान तक पहुंचाओ जो सोचता है कि सिस्टम नहीं बदल सकता। शेयर करो और 'Tej Scroll' को फॉलो कर लो।
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