Discussion on Ambedkar's Philosophy
जिसको इतना जुल्म सहना पड़ा हो,
जिसका बचपन
अन्याय, उपेक्षा और उत्पीड़न से बीता हो,
जिसने अपनी मां को अपना में अपमानित होते देखा
हो। मुझे बताइए
ऐसे व्यक्ति को मौका मिल जाए
तो हिसाब चुकता करेगा कि नहीं करेगा।
तुम
तुम मुझे पानी नहीं भरने देते थे। तुम मुझे मंदिर
नहीं जाने देते थे। तुम
मेरे बच्चों को school में admission देने से मना करते
थे।
मनुष्य का जो level है ना,
वहां यह बहुत स्वाभाविक है। लेकिन जो
मानव से कुछ ऊपर है
वह बाबा साहब आंबेडकर थे कि जब उनके हाथ
में कलम थी,
कोई भी निर्णय करने की ताकत थी। लेकिन
आप पूरा संविधान देख लीजिए। पूरी संविधान सभा की debate देख
लीजिए। बाबा साहब आंबेडकर की बातों में, वाणी
में, शब्द में कहीं कटुता नजर नहीं
आती है। कहीं बदले का भाव नजर नहीं आता है।
उनका भाव यही रहा
और वह भाव क्या था? मैं अपने शब्दों में कह सकता हूं कि
कभी कभार।
खाना खाते समय
दांतों के बीच
हमारी जीभ
कट जाती है,
लेकिन हम दांत तोड़ नहीं देते
हैं।
क्यों?
क्योंकि हमें पता है दांत भी मेरे हैं, जीभ भी मेरी
है। बाबा साहब आंबेडकर के लिए सवर्ण भी उनके
थे और हमारे दलित, पीड़ित, शोषित
दोनों ही उनके लिए बराबर थे और इसलिए बदले
का नामो निशान नहीं था। कटुता का नामो निशान नहीं
था। बदले की भाव को जन्म न देने का और समाज को
साथ लेकर चलने की प्रेरणा देने वाला प्रयास बाबा साहब आंबेडकर की हर
बात में झलकता है और यह देश।
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