रात का मुसाफिर: जीते जी तेरा हो सका ना
अन्धल की रात का एक मुसाफिर सुभहा अलगदा कह चला
जीते जी तेरा हो सका ना
मर के हत राखर चला
End of transcript · 21 words
अन्धल की रात का एक मुसाफिर सुभहा अलगदा कह चला
जीते जी तेरा हो सका ना
मर के हत राखर चला
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