Personal struggle and resilience in aviation
उस moment में sir,
मैं, हाँ मैं अपनी, मैं अपनी life के लिए लड़ रहा था।
But एक ऐसा moment था जब मेरे को realize हुआ कि अगर मैंने कुछ
नहीं किया, क्योंकि मैं गिर चुका था। मेरे को इतने घाव
लग चुके थे कि मैं
गिर चुका था नीचे। And
उस time पर मैं बोला, अगर मैं नहीं उठूंगा, and मैं as a मैं
सत्रह साल से जहाज उड़ा रहा हूँ। मैं पिछले ग्यारह साल से captain
हूँ।
और मुझे पता चलता है आँख बंद करके भी कि जहाज में क्या हो रहा है।
जब मैं नीचे गिरा हुआ था तब मुझे, तब मुझे एहसास हो
रहा था कि air craft नीचे जा रहा है। और मुझे बिल्कुल पता था कि
ये एक last push अगर Smith कर दे,
दरवाजा बस वहीं है।
और तभी भी मैं मार खा ही रहा था। बस
वो खोल दिया sir, बाकी सब आगे। और बाकी सबके भी
उतनी, उतनी उसमें,
उसमें role था। But जान
के मैं सबको बोला था कि मैं अपनी जान के हिसाब से कर रहा
था। But at the same time मुझे इतना भी पता था कि मैं उन सबको नहीं मरने
दे
सकता।
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