Political Speech on Hindu Unity
हमारा परिचय पूछते हो तो हम शिव के कार्तिकेय
हैं। हमारा क्रीड़ांगन कैलाश है और
देवों का सेनापति बनना ये हमारा
इतिहास है। तुम हमारी बात करते हो तो फिर हमारी
पूरी परंपरा का परिचय आंखें खोलकर देखो। मैं आप
सबके बीच में एक ही बात कहने जा रही हूं। चुनाव के
दिन आते हैं तो कुक्कड़ मुत्तो की तरह लोगों के गंदे विचार
बाहर निकलते हैं। हिंदू जाति को जातियों में
विभाजित करने के षड्यंत्र चलते हैं। मेरा एक मंत्र
है इस हुंकार सभा में हिंदुओं
उसको याद रखिएगा। हम यदि आपस में बंट
जाएंगे, हम यदि आपस में बंट जाएंगे
तो हिंदू चेतना के बिंदु धुंधलाएंगे। 92 तो राम
जन्मभूमि के आंदोलन का क्लाइमैक्स था। हम 84 से
गली गली, गांव गांव की धूल फांकते सिर पर धारण
करते हुए हिंदू जाति के गौरव के लिए हर पल
हर क्षण अपने चित्त में कुछ दर्द है, कुछ ज्वालाएं हैं, कुछ आग
है जो हर दिल के अंदर बोना हमारी जिम्मेदारी है। उस
जिम्मेदारी के बोध से अपने समाज के बीच में जानते हैं बंटो मत,
काटो मत। देश के स्वाभिमान के लिए, अपनी सुंदर
भावनाओं के लिए छोड़ दो इसको। एक एकड़ा प्रवृत्ति को
छोड़ दो हिंदुओं। आज उतना विरोध मुसलमान नहीं करता
जितना हिंदू ही हिंदू के इस अभियान का विरोध करता दिखाई देता
है। क्या यह सच नहीं है? क्या यह सच नहीं है?
मैं आपसे पूछना चाहती हूं।
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