पाकिस्तान से व्यापार बंद, अफगानिस्तान के चीन और तुर्की से नए रेल रास्ते
अफगानिस्तान ने अपने लिए रास्ता खोल दिया है, जबकि पाकिस्तान के हाथ कुछ नहीं
आए। अफगानिस्तान के साथ जो पाकिस्तान की सूरत-ए-हाल है, एक साल से
ज्यादा हो गया। तिजारत बंद है और पाकिस्तान को अरबों डॉलर का नुकसान
हो चुका है। इसके ते के जितने ताजर हैं वो बेचारे बीच में दिवालिया हो गए दोनों
तरफ। और इसके दौरान पाकिस्तान में जो पाकिस्तान की
establishment थी, जो पाकिस्तान के planners थे,
उनका ये ख्याल था कि अगर
हम अफगानिस्तान की तिजारत का रास्ता बंद कर देंगे तो अफगानिस्तान
पर pressure बढ़ेगा और पाकिस्तान वो तमाम मुताल्बात उससे मनवा
पाएगा जो कि पाकिस्तान मुथल्थल् करता चला आ रहे हैं। लेकिन लगता
है कि उसका नतीजा उसके बिल्कुल बरक्स निकल रहा है। तिजारत की इस बंदी से
जो कि अफगान media कह रहे हैं कि पचानवे फीसदी तिजारत जो है वो बंद है।
जबकि इसका जो सबसे ज्यादा असर है वो पाकिस्तान की अदवियात की industry पर है।
क्योंकि
पाकिस्तान की market सिर्फ अफगानिस्तान नहीं थी बल्कि अफगानिस्तान के रास्ते Central
Asia भी पाकिस्तान की products चाहती थी। तो पाकिस्तान की जो
pharmaceutical industry है उसको बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है और
मजीद हो रहा है क्योंकि पाकिस्तान ने वो market खो दिया। अफगानिस्तान की भी और
Central
Asia में भी इसके लिए काफी मुश्किलात पैदा हो रही हैं। जबकि
अफगानिस्तान ने भी अब क्या किया है? उन्होंने अब तुर्की के साथ
अपना तिजारती रास्ता खोल दिया है
रेल के रास्ते। आज इतलात हैं कि अफगानिस्तान ने हेरात
के खवाफ रेलवे के ज़रिए जो इसे ईरान से जोड़ती है, तुर्किया
को छह सौ टन कपास की पहली बड़ी खेप बरामद की
है। और इसके अलावा एक और बड़ी पेशरफ्ती है कि चीन ने भी
अपना जो तिजारती रास्ता है वो अफगानिस्तान के साथ बराहेरास्त
मालबर्दारी का train service जो है वो शुरू कर दी है। इस सिलसिले में
आज China से कुछ ऐसे visual आ रहे हैं कि जहां से एक train
वहां से अफगानिस्तान के लिए रवाना हो चुकी है जिसमें कि अफगानिस्तान का
जो माल है वो अब direct ज़रिए train अफगानिस्तान आएगा। अब
पाकिस्तान की उस policy का क्या नतीजा निकला जिसको पाकिस्तान की
रियासत ने तरतीब दिया था और शायद उसमें parliament का कोई किरदार नहीं
था। वो ये कि अब पाकिस्तान ने अपना जो वो
जो leverage था अफगानिस्तान पर कि वो कुछ ना कुछ pressure डाल सकता
था वो खो दिया और शायद मजीद खोएगा क्योंकि
जूं जूं ये तिजारत बढ़ेगी जब भी ईरान और
अमेरिका के दरमियान जंग मुकम्मल तौर पर खत्म हुई तो आप देखेंगे कि
ईरान main transit route बनेगा चाहे वो उनकी बंदरगाह
हो यानी चाबहार और बंदर अब्बास जो कि अफगानिस्तान already इस्तेमाल
कर रहा है या फिर रेल का रास्ता हो तुर्किया के लिए। इस policy के
नतीजे में पाकिस्तान अफगानिस्तान से कट गया। पाकिस्तान Central Asia से कट गया।
पाकिस्तान का जो तुर्कमेनिस्तान के साथ gas pipeline का मनसूबा था
वो भी अब मजीद तातर का शिकार हो गया एक ऐसे वक्त जब पाकिस्तान को
gas की शदीद जरूरत है। पाकिस्तान energy deficient मुल्क है। तो एक
गलत policy का वो नतीजा जिसके अब हमें नताइज जो हैं
वो नजर आ रहे हैं कि जहां पर अफगानिस्तान जो है वो पाकिस्तान से मजीद कट
रहा है और उसने अपने लिए नए रास्ते तलाश कर लिए हैं।
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