Election Commission Controversy Analysis
Second और third phase के SIR के बदलाव को भी Supreme Court का कह रहे हैं। Supreme
Court के नाम पर झूठ बोल रहा था Election Commission। पकड़ा गया तो अब
तरह-तरह की बातें होने लगीं। आइए अब आपको दिखाते हैं 29 सितंबर को क्या हुआ
और धीरे-धीरे करके 15 अक्टूबर तक आएंगे और मैं इसको भी एक तरीके का
nefarious design नहीं मानता हूँ। आप ये भलमनसाहत में किया गया कि हम
सुधार कर रहे हैं अपने अंदर, ये वो चीज नहीं है। ये पकड़े जाने पर
धीरे-धीरे-धीरे करके चीजों को बदलने का प्रयास है और उस चक्कर में ये हो कि
एक बड़ा सवाल Gyanesh Kumar के विरुद्ध जो है वो ना उठे, उसका एक प्रयास लगता
है। 29 सितंबर को instructions were issued for special drive to include
eligible
voters who were deleted during SIR.
ये बहुत बड़ा कदम है क्योंकि इसका मतलब ये है कि जहाँ-जहाँ जो-जो SIR
exercise खत्म हो चुकी है, निपट चुकी है, बंद हो चुकी है, चुनाव हो
चुके हैं। मसलन बिहार, बंगाल वहाँ का सारा SIR वापस
खुलेगा। वहाँ पर फिर से अगर कोई eligible voter है तो वो जो delete हो गया
SIR में उसको वापस लाया जाए। पहले तुम एक exercise लाओ। उस
exercise में लोगों को out कर दो। उसके बाद एक चुनाव करा लो और
फिर जब pressure हो तो आप दोबारा से एक exercise करें कि जो लोग बाहर
किए गए हैं वो अंदर चले आएं। क्या लोगों के यही काम है कि वो अंदर बाहर, अंदर
बाहर यही करते रहें। तो ये जो चीजें हुई हैं, ये बहुत clearly एक
damage control है।
ये 29 सितंबर की बात थी और इसको लेकर के Indian Express ने ये माना कि ये तो clear
admission of guilt है। ये तो साफ-साफ जो चीज हम लोग कह रहे थे वो Election
Commission
मान रहा है। 9 अक्टूबर को और ये बहुत interesting है submission of form seven
application was capped at ten for an individual voter during claims and
objections period. Cap is five per month during continuous
updation of electoral rolls. ये भी important है क्योंकि इसको लेकर के भी
कि कौन
object कर रहा है किसी और के ऊपर, कौन नहीं object कर रहा है, उसमें उसका
misuse, इन सारी चीजों को देख कर के उसको 10 पर cap
कर दिया कि 10
से ज्यादा objection आप एक इंसान नहीं raise कर सकता। ठीक है। अब 15 अक्टूबर
को एक बहुत major चीज हुई और ये यहाँ से आप ये समझिए
कि इन सारी चीजों को perspective में लेते हुए जब हम यहाँ आते हैं तब आपको एहसास
होता है कि boss गड़बड़झाला तो बहुत ही तगड़ा था। इनको
एहसास हो रहा है इन भाई साहब को कि बहुत बड़ी गड़बड़ कर दी है Chief Election
Commissioner Gyanesh Kumar ने। क्योंकि अब धीरे-धीरे, धीरे-धीरे course correction हो
रहा है।
Announcement of special summary revision in seventeen states and Union
Territories where SIR has ended.
Special summary revision. पहले special intensive revision,
फिर special
summary revision. Revision का revision का revision का
revision यही करता रहे
देश।
आपकी revision ही करते रहे और उसके बाद आप इतना revision करके exam में खुद
fail हो जाएं। ये Gyanesh Kumar की कहानी है मोटी-मोटी। कहने का मतलब
ये था कि अब अलग-अलग राज्यों में दोबारा से एक
SIR की exercise होगी और आगे के राज्यों में इस मौजूदा
तरीके से SIR नहीं होगी। इतने बवाल के बीच में ये प्रक्रिया रोकी गई
है। तो अब आप खुद ही समझ लीजिए कि जो पिछली हुई है उसका जो अपराध
हुआ है, ये तो आप जब लोगों को ये कह रहे हैं कि हम
special drive करके लोगों को
वापस लाएंगे। यानी कि आप मान रहे हैं कि आपने गलत delete किया था।
तो जो गलत delete किया है फिर उसकी inquiry भी तो होगी। चुपके से आप क्या ऐसे ही कोई
आदेश pass कर दीजिएगा।
ये आदेश pass ही क्यों किया और किसके कहने पर
आपने लोगों के नाम काटे और क्यों काटे?
उसकी भी तो जांच होनी चाहिए।
क्योंकि अब आप वही कर रहे हैं। आप मानते हैं इस कदम से ये साफ हो गया है कि आप मान
रहे हैं कि कुछ गड़बड़ थी। इसके अलावा एक बहुत बड़ी demand
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