Activism and Citizenship Rights in India
ये भूल गए कि JNU से आते हैं उमर खालिद।
वो उमर खालिद जिसको आपने जेल में छह साल से ज्यादा बंद रखा।
लेकिन उस उमर खालिद ने आज भी इस justice की लड़ाई का दामन नहीं
छोड़ा। हम उस उमर खालिद को देख कर के activism को यहां पर सीखते हैं। यह JNU
उस उमर खालिद का JNU है। जब दो हज़ार उन्नीस में आप
लोग CAA और NRC लेकर के आए और चुन चुन कर के
मुसलमानों को citizenship से बेदखल करने की कोशिश कर रहे थे।
तो तब जो students जामिया के उठ खड़े होते हैं equal citizenship के
लिए, democracy के लिए। तो आप उनकी library में
घुस कर
के, campus में घुस कर के लाठियां बरसाते हैं
उनके ऊपर और
उनके सर खोल के रख देते हैं। यह गुस्सा उस हिंसा का गुस्सा
है। इस गुस्से को तो हमने कभी dissipate नहीं होने दिया था। नहीं
भूलेंगे कि आप लोगों ने कालाधन खत्म होगा बोल कर के
हमें demonetisation की लाइनों में खड़ा कर दिया और उन लाइनों में न जाने
कितने आम लोगों ने अपना दम तोड़ दिया। लेकिन कालाधन सिर्फ
आपके account में गया। कोई जनता का पैसा वापस नहीं आया। जो मौतें हुई हैं
demonetisation की लाइनों में, यह उस चीज का डर, उस चीज का गुस्सा है
जो आज सड़कों पर उमड़ रहा है। जब आप लोगों ने दो हज़ार उन्नीस में
CAA और NRC को लागू करने की कोशिश की।
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