Political Criticism and Accountability
चुप कराओ अभिजीत दीप्ते। थोड़ा सा अपनी जुबान को लगाम देना समझ में आया। तू होता
कौन
है? देश के प्रधानमंत्री को कायर बोलने वाला।
औकात क्या है तेरी कि तू देश के
प्रधानमंत्री के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल करेगा?
शुक्र मना कि तेरे हाथ में माइक है और तू ये बोल पा रहा है। इतिहास का प्रधानमंत्री
अगर कोई होता ना तो ना दो मिनट नहीं लगते, दो मिनट मौत के घाट
उतार दिया जाता तू अभी तक। या तो तेरी नसबंदी हो जाती। सारी की सारी रणनीतियां धरी
की धरी रह जाती। समझ में आया। माइक हाथ में आ जाने से बहुत बड़ा योद्धा नहीं बन
जाता है तू। 30 साल के सौरभ दास और आशुतोष रागा रांका को तू बच्चा बोल रहा है। बच्चों
की दुहाई दे रहा है। अरे शर्म कर ले। क्या बोल रहा है तू?
मोदी जी के पोते के उम्र के हैं ये लोग। इनको जेल में डाल दिए हैं। तुझे नहीं पता कि
तुझे अपने दादाजी से कैसी बात करनी चाहिए, किस सम्मान से बात करनी चाहिए। तुझे अपने घर
वालों ने नहीं सिखाया संस्कार क्या होते हैं। पहले तू सीख। तू अपने बाप को,
अपने दादा
को कायर बोल देगा। जब तू बोल रहा है कि वो तुम्हारे पोते की उम्र के हैं तो तू भी तो
सोच वो तेरे किस उम्र के हैं। वो तेरे क्या लगते हैं?
आया बड़ा आलोचना करने। आया बड़ा भारत में अरुचिकर फैलाने। दूसरों के पैसों से दलाली
मत कर। भारत में इसी भारत में जन्मा है तू। इसी भारत का है तू। याद रखना इस बात को।
अधेड़ अधेड़ उम्र वाले लोगों के साथ बैठकर बच्चों की दुहाई दे रहा है कि 33 साल के
बच्चों के साथ जुल्म हो रहा है। नेहा रा। बच्ची है प्रशांत भूषण। बच्चा है
केजरीवाल। बच्चे हैं मनोज सिसोदिया। बच्चा है, तू बच्चा है। बेफालतू की
राजनीति मत कर। बांग्लादेश बनाना चाहता है ना भारत को। ये तो होने नहीं देगा है।
प्रधानमंत्री की आलोचना करने के लिए तू इतने बड़े बड़े अनर्गल शब्दों का इस्तेमाल कर
रहा है। तू क्या संस्कार है तू पहले ये देख। तू क्या भारत को बचाएगा?
तू क्या बच्चों के लिए इंसाफी बनेगा?
तेरे 10 बार बोलने से वो कायर नहीं हो जाता। शुक्र मना शुक्र मना की चाय बेचने वाला
प्रधानमंत्री है। गलती से अगर बुलडोजर बाबा प्रधानमंत्री होता ना तो तेरा तो अभी तक
पता ही नहीं होता। कहां है तू शुक्र मना और ऐसी भाषा का जो इस्तेमाल कर रहा है ना
वो तो भगवान जाने वो क्यों शांत है मुझे तो समझ में नहीं आ रहा है क्योंकि उनको देश
संभालना है। तुम जैसे लोगों से निपटना भी है और देश की जनता को जो तुम manipulate कर
रहे हो उनको भी संभालना है। वो प्रधानमंत्री है जो अच्छे अच्छे विरोधियों को नाक चने
चने बनवा देते हैं। तू उनके सामने तू ऐसी सब ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रहा।
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