Discussion on Caste System and Social Harmony
ये शूद्र को ब्राह्मण के घर नहीं जाना चाहिए। वो meme भीम वाले आजकल ये बहुत
ज्यादा बताते हैं और ब्राह्मण को शूद्र के घर नहीं जाना चाहिए। ये
जो जाति प्रथा है कि वर्ण व्यवस्था और उसने
जाति प्रथा का नाम लेकर ये simple ये बोलने लग गए कि शूद्र को ब्राह्मण के यहां
नहीं जाना, ब्राह्मण को शूद्र के यहां नहीं जाना। जब हम
सत्यनारायण व्रत कथा को
करते हैं, सुनते हैं, पढ़ते हैं उसको तो हमें ये चीज crystal
clarity के साथ
होती है। पहला example आता है ब्राह्मण, लकड़हारा। दोनों का संवाद
हो रहा है। लकड़हारा ब्राह्मण के घर पर गया। लकड़हारा क्या है?
श्रमिक class है, शूद्र है। वर्ण व्यवस्था से तो लकड़हारा
ब्राह्मण
के घर में प्रवेश करता है। वहां प्रसाद लेता है, कथा सुनता है। ब्राह्मण उसको सब कुछ
बता रहा है। आज से हजारों साल पहले और हर घर में ये पूजा हो
रही है तो ये पूजा कभी differentiate कर ही नहीं रही। ब्राह्मण और शूद्र के
बीच में इतना बढ़िया connection पहले से establish कर रही है। दूसरा example राजा
उल्कामुख जो थे, वो वैश्य के साथ। क्षत्रिय और वैश्य का
कितना
बढ़िया संयोग दिखा रहे हैं कि व्यापारी सीधे राजा से धर्म सीखता है।
धार्मिक ज्ञान और वर्ण सीमाओं से परे होता है, ये चीज वो बता रहा है। फिर
उसके बाद राजा चंद्रकेतु और वैश्य व्यापारी इन दोनों का संवाद आता है।
क्षत्रिय और वैश्य का फिर से आता है। राजा और व्यापारी वर्ग के बीच में
न्याय की बात हो रही है, सम्मान की बात हो रही है,
सामाजिक विश्वास की बात हो
रही है, उसकी पुनर्स्थापना होती है। फिर सत्यनारायण
भगवान
दंडी का वेषधारी करते हैं और उसके बाद जो है दंडी के वेषधारी
में वैश्य व्यापारी से मिलते हैं तो भगवान और वैश्य का भी संवाद हो रहा
है। ग्रामीण ग्वाले, ग्वाले जो होते हैं राजा के साथ deal
कर रहे हैं। ग्वाले जो हैं, जो गाय चरा रहे हैं, वो जंगल में
भगवान सत्यनारायण की पूजा कर रहे हैं और राजा वहां पर आता है। तो एक
राजा ग्वालों से कैसे directly interact कर रहा है। वन में होने वाली
पूजा में सम्मिलित हो रहा है। तो ये जो social harmony है वो बहुत ही ज्यादा है।
फिर ऋषि समुदाय और सूतजी जो है सर्वशास्त्र ज्ञाता। तो मैं ये कहता
हूं कि जो सत्यनारायण व्रत कथा है, वो जो जाति की, जो जाति प्रथा
जो आज चली हुई है surname based इसको बिल्कुल खत्म करती है। ये
हमेशा से हजारों साल से समाज में जो है एकता
और सौहार्द को बढ़ाने का एक बहुत बढ़िया माध्यम था। क्योंकि
जब लकड़हारा और ब्राह्मण का संवाद जब हो रहा है, उसी से पता चलता
है। तो सत्यनारायण कथा जिस घर में हो रही है, उनको ये चीज हमेशा सीखना चाहिए
कि कभी भी जाति कुप्रथाओं से दूर रहें। हर एक को
equal treat करें क्योंकि जाति प्रथा अच्छी नहीं है। And I like because of
the Tamil Nadu culture because in Tamil Nadu they have forgotten
the surname.
Yeah, it's because there is no surname.
Father's name carried by the son. First name becomes surname.
It's a beautiful way of doing this.
मेरा बस चले तो मैं तो कबका कर दूं इसको। पूरे India में लागू कर दूं because
this is where we got wrong. मैं जोशी, मेरा बेटा भी जोशी
and he is doing some very bad karma. How can he be a ब्राह्मण?
I am ब्राह्मण because I am reciting Vedas. I am doing all this पूजा.
You do पूजा. Doesn't matter your name is Singh. You become a ब्राह्मण.
That's how it was in past. That वर्ण व्यवस्था कर्म के आधार पर
देती थी. Qualities and abilities.
There is
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