Political Discussion on Secularism and Elections
राहुल जी आपको लगते हैं कि हाँ योगी मोदी...
...के साथ धर्म नहीं जुड़ा हुआ है। राजनीति को वो राजनीति के तरीके से लेते हैं।
ये क्या बात, ये क्या बात करता है यार!
उनके साथ सारे धर्म के लोग जुड़े हैं। यहाँ पे सांप्रदायिकता ज़्यादा फैल रही है।
हिंदू-मुसलमान, हिंदू-मुसलमान...
...हमने इतने सालों में पहले नहीं सुना था जितना अब सुन रहे हैं।
फिर तो प्रॉब्लम है। अभी ठीक करके देता हूँ।
पहले सिर्फ़ मुसलमान-मुसलमान होता था, अब हिंदू भी होने लगा है।
तो अब दोनों के लिए काम हो रहा है, पहले एक ही काम हुआ करता था।
बोलना भी हूँ हूँ क्या कर रही है, बोल!
एक धर्म को लेकर क्यों बैठ जाना? हम हज हाउस बनाएँगे,
हम हज सब्सिडी देंगे, हम इफ़्तार पार्टियाँ करेंगे।
तो सेक्युलर स्टेट है, जब जो सबके लिए सेम होना चाहिए।
बिल्कुल सेम होना चाहिए।
मौलवियों को सैलरी है, पंडितों को सैलरी नहीं है।
क्या बात है सर, क्या बात है सर!
जितना कुछ सालों में हिंदू-मुसलमान हुआ है इन सालों में, ये पहले तो नहीं हुआ।
क्या? ये क्या बकचोद...
हेट स्पीच अब होती है, पहले इतनी हेट स्पीच नहीं होती थी।
पहले दंगे कैसे हो जाते थे?
हेट स्पीच पहले, पहले इतनी नहीं होती थी।
रुक-रुक, तेरे को बताता हूँ, तेरी माँ की...
इन्होंने बोला कि दंगा अब हो रहा है, हिंदू-मुस्लिम अब हो रहा है।
इनको शायद पता नहीं है, जिसमें देश आज़ाद नहीं भी हुआ था ना,
उसमें कांग्रेस उस टाइम से थी और कांग्रेस उस टाइम से मुसलमान का वोट पाने के लिए तलवे चाट रही है।
उससे पहले भी चुनाव हो रहे थे और कांग्रेस उसमें पार्टिसिपेट कर रही थी।
आज़ादी के बाद इतने बड़े दंगे हुए,
इतना बड़ा नरसंहार हुआ हिंदू-मुसलमान का, उसमें कौन सी बीजेपी थी?
पता नहीं।
मैं कह रहा हूँ राहुल जी एक बेहतर चॉइस हो सकते हैं 2024 के चुनाव में, आपको क्यों नहीं लगता?
देखिए, जो गधे हैं वो गधे को चुनेंगे, सिंपल सी बात है।
जो गधे हैं वो गधे को चुनेंगे, उनका नेता वही होगा।
गज़ब बेइज़्ज़ती है।
आप गधा क्यों बोल रहे हैं भाई?
और क्या बोलें उनको? और क्या बोलें उनको?
उनका कोई काम ऐसा बताइए जो उन्होंने काम किया हो घोड़े वाला?
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