Election Commission Controversy and Accountability
खबर यह नहीं है कि चुनाव आयुक्त में तीनों की कुट्टी खत्म हो गई
है कि दोपहर तीन बजे तीनों ने मिलकर एक
joint press release issue कर दिया है या कि करवा दिया गया है
उनसे। खबर यह नहीं है कि संधू और जोशी ने finally ज्ञानेश कुमार
से अपनी बातें मनवा ली हैं। खबर यह भी नहीं है कि इन तीनों
की लड़ाई में और सुलझाई में जनता को छोटे मोटे फायदे हो गए हैं।
महाराष्ट्र और दिल्ली की date extend हो गई है। अब logical
discrepancy और unmapping के नाम पर आपको hearing में पर
नहीं आना पड़ेगा। गरीब और homeless के लिए special drive चल
जाएगा। खबर यह है कि अब तक जो
संदेह था वह प्रमाण में बदल गया है।
Admission of guilt है यह document जो चुनाव आयोग ने
issue किया है।
कहते हैं जिस software के आधार पर करोड़ों
लोगों के नाम कट चुके हैं, अब एक expert
committee बनेगी यह जांच करने के लिए कि वह नियम
और कानून के अनुरूप है कि नहीं है; होने के बाद।
दूसरा, कहते हैं कि form six जिन
state में SIR नहीं था, वहां पुराना form six
जारी रहेगा। तो पिछले कई महीनों से जो illegality हुई है
उसको स्वीकार कर रहे हैं। कहते हैं कि चुनाव
आयोग आयुक्तों की बात को चुनाव आयोग के अफसर माना
करेंगे। अब तक नहीं मानते थे ना।
और सबसे बड़ी बात लिख कर कह रहे
हैं कि आगे से चुनाव आयोग की बैठक पर
का agenda हुआ करेगा, उसके minutes बनेंगे।
मतलब अब तक आप न्यूनतम चीजों को follow नहीं करते
थे। अगर college के department की meeting बिना
agenda और minutes के हो जाए तो बवाल हो जाता है।
केवल इस आधार पर पूरे commission को dismiss कर
देना चाहिए।
असली सवाल जिसका कोई जवाब नहीं देती यह press
release। अब तक इस देश में जो 13 करोड़
नाम गलत तरीके से delete हुए हैं, इसके अनुसार ही
उसका जवाबदेह कौन होगा?
अब तक
जवाबदेह एक व्यक्ति था ज्ञानेश कुमार, जिसका इस्तीफा
मांगा जा रहा था। लेकिन इस press release के बाद स्पष्ट
है कि एक नहीं तीनों मुख्य चुनाव
अभियुक्त हैं। तीनों का इस्तीफा होना
चाहिए। बहुत खिलवाड़ कर लिया आपने देश के साथ। अब
जाइए आप।
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