Religious Education in Schools
मुसलमान, हर एक मुसलमान मदरसों में, हर एक मुसलमान पढ़ता है, हर एक मुसलमान
अपने कलमा, आयात, अपनी कुरान जानता है। लेकिन
आज ये स्कूल के बच्चे ये भी नहीं जानते वेद कितने हैं।
हम ये भी नहीं जानते कि हमारे कितने ऋषि हैं,
सबसे पहले ऋषि कौन हैं, वेद क्या है, वेद क्या है। केवल इतना
स्कूल में पढ़ते हैं। लेकिन
आज वो मुसलमान वो छेददार टोपी वाले अपने बच्चों को मदरसे में पढ़ाते हैं, कलमा पढ़ना सिखाते हैं,
कुरान पढ़ना सिखाते हैं। हमारे घर में वेद नहीं है, किसी के घर में भगवद्गीता नहीं है।
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