History and Significance of Kashi
यह काशी नगरी है काशी नगरी। पहला नाम इसका जो है
आनंदवन था।
आनंदवन से काशी हुआ।
काशी से फिर जो है वाराणसी हुआ।
वाराणसी से फिर बनारस हुआ। और ऐसा
पूरे विश्व में नहीं है। घाट किनारे जितने राजा
महाराजा थे सब यहां मरने के लिए आए थे। यहां
मरने का फल है। काशी में मरने का फल है। क्यों?
कि शंकर जी साक्षात यहां विराजमान है। शंकर जी
साक्षात यहां विराजमान है। जिसका यह विश्वशस्त है। काशी
का जो जानता है तो लंदन है, पेरिस है। यहां मिलता है।
विश्व में कहीं भी जाएगा। अपने बच्चे से बोलता है कि बेटा
हम मर जाएंगे तो हमारा लाश को काशी में
खोकना। क्यों-क्यों-क्यों? यह धरती पर जो है,
हर चीज की जोड़ी है। एक प्राण तो घर में निकलता है और
एक प्राण जो है श्मशान में निकलता है। जब यह ब्रह्मांड
फटेगा कब? यह ब्रह्मांड फटता है तब यह प्राण निकलता
है।
End of transcript · 156 words