Controversial Speech on National Identity
कैसे मनाऊंगा तेरी आजादी का दिन। ऐ वतन!
मेरा दिल मान ही नहीं रहा कि मैं आजाद हूं। यह जो अब्दुल है
अब्दुल और यह जिस कौम से belong करता है ना, यह बहुत ही मादरचोद कौम
है। यह इतने बड़े रंडी वाले हैं यह मादरचोद। नाजायज औलाद, सूअर की औलाद। इतने
बड़े मादरचोद हैं कि उन्नीस सौ सैंतालीस में देश आजाद हुआ। इन
मादरचोदों को दो देश दिया गया। एक पाकिस्तान,
एक बांग्लादेश। फिर भी इन मादरचोदों को
लगता है हम आजाद नहीं हैं। हमको जी नहीं दिया जा रहा है। अरे मादरचोद, आजादी के समय
पर तुम लोग इंडिया में मात्र पचास लाख से एक करोड़ थे। आज तुम लोग मात्र सत्तर साल में
सूअर की तरह तीस से चालीस करोड़ हो गए हो। वही उल्टा देखो पाकिस्तान
में और बांग्लादेश में जितने हिंदू थे उनको तो तुम लोग काट काट के
खत्म कर दिए। एक percent डेढ़ percent हिंदू रह गया है।
तो अब कितना आजादी चाहिए तुम लोग को। कितना आजादी चाहिए। सूअर की तरह पचास लाख
से चालीस करोड़ हो गए हो। अब कितना आजादी चाहिए तुम लोग को। कहो तो
हिंदू अगर अपने पर आ गया ना तो तुमको आजाद कर देगा। अगर सही में नेपाल की तरह
हिंदू यहां पर अगर सनक गया, जिस दिन माथा पीरा,
तुमको यहां से पूरा धरती से हम आजाद कर
देंगे हम लोग समझ लेना एकदम।
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