Critique of Indian Political Leadership
70 साल में आज तक कांग्रेस के जितने भी प्रधानमंत्री बने वो सबसे बड़े बेवकूफ थे।
क्योंकि वो 70 साल में ये पता नहीं लगा पाए कि भारत की जनता को क्या चाहिए।
यहाँ के लोगों को मंदिर चाहिए था, उन्होंने इसरो बना दिया। मंदिर चाहिए था, उन्होंने भाखड़ा नांगल बांध बना दिया।
मस्जिद चाहिए थी, उन्होंने एनटीपीसी की स्थापना कर दी। मंदिर चाहिए था, उन्होंने एम्स और अस्पताल बनवा दिए।
मस्जिद चाहिए थी, उन्होंने आईआईटी और आईआईएम बनवा दिए। मंदिर चाहिए था, उन्होंने डीआरडीओ बनवा दिया।
मस्जिद चाहिए थी, उन्होंने आरटीआई का अधिकार दे दिया। मंदिर चाहिए था, उन्होंने योजना आयोग की स्थापना कर दी।
मस्जिद चाहिए थी, उन्होंने शिक्षा का अधिकार लागू कर दिया। मतलब ये लोग इतने बड़े बेवकूफ थे कि इन्हें ये तक नहीं पता था
कि वोट लेने के लिए सिर्फ मंदिर-मस्जिद बनवाना है। और ये लोग पागलों की तरह हरित क्रांति,
निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण, पीएसयू डेवलपमेंट और आर्थिक उदारीकरण करवाते रहे।
इतनी मेहनत नहीं करनी थी भाई। इससे अच्छा जनता का टैक्स का पैसा जेब में डालते और मंदिर-मस्जिद बनवा देते।
और अब भी राहुल गांधी इससे कुछ नहीं सीख रहा। वो भी मंदिर-मस्जिद की बात नहीं करता।
उसको भी बेरोजगारी, पेपर लीक, एमएसपी, रुपये की गिरती कीमत, इन सबसे मतलब है बस।
अरे राहुल भाई, अमित शाह के भाषण से कुछ सीखो कि किस तरीके से भाषण दिया जाता है।
ये राहुल बाबा और लालू जी सीता माता का मंदिर बना सकते हैं क्या?
लोग यहाँ पर अपनी माँ को गाली देने के नाम पर वोट माँग रहे हैं।
तुम्हारी तो दादी और पिता की हत्या करवा दी थी। तुम्हारे पास तो इतना बड़ा विकल्प है वोट माँगने का।
ये लोग कश्मीर में धारा 370 के नाम पर वोट माँगते हैं।
और तुम्हारी दादी ने तो पाकिस्तान के एक हिस्से को स्वतंत्र देश बांग्लादेश बनवा दिया। माँगो उसके नाम पर वोट।
कुल मिलाकर मेरा आपसे यही कहना है कि 80% जनता के लेवल की बात करो, अंधभक्त मत बनो।
फिर कोई अंधभक्त ये नहीं बोलेगा कि राहुल गांधी इतना समझदार है तो प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन जाता इस देश का।
क्योंकि भारत जैसे देश का प्रधानमंत्री बनने के लिए आपको समझदार नहीं, आपको बेवकूफ बनना पड़ता है।
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