Debate on Language and Education Policy
उर्दू को नहीं करते? उर्दू भी तो भाषा है। उर्दू को नहीं करेंगे, अंग्रेजी करेंगे?
कि आप समाजवादियों का चरित्र ही इतना दोहरा हो चुका है,
इतना दोहरा हो चुका है कि अपने बच्चों को भेजेंगे इंग्लिश पब्लिक स्कूल में
और दूसरों के बच्चों को बोलेंगे कि गांव के उस विद्यालय में पढ़ें जहां संसाधन भी नहीं हैं।
अपने बच्चों को ये लोग पढ़ाएंगे इंग्लिश स्कूलों में
और दूसरे के बच्चे के लिए अगर वो सुविधा सरकार देना चाहती है तो कह रहे हैं नहीं उर्दू पढ़ाओ इसको।
यानी उसको मौलवी बनाना चाहते हैं, मध्ययुगीन प्रवृत्तियों की ओर उसको ले जाना चाहते हैं। ये नहीं चल सकता है।
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