India's Strategic Relations with Seychelles
हमारे देश में विपक्ष के नेता ये सवाल पूछ रहे थे
कि प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स जैसे छोटे से देश में आखिर क्यों गए?
तो दुनिया के मानचित्र पर इस देश की जो लोकेशन है, वही उसे बहुत खास बनाती है।
ये देश 115 छोटे-बड़े आइलैंड्स को मिलाकर बना है और विक्टोरिया शहर इसकी राजधानी है।
सिर्फ 1,23,000 की जनसंख्या वाले इस देश में लगभग 13,000 भारतीय भी रहते हैं।
माहे इस देश का सबसे बड़ा द्वीप है और इसी द्वीप पर इस देश की लगभग 90% आबादी रहती है।
इस देश का क्षेत्रफल लगभग 445 वर्ग किलोमीटर है, सिर्फ 445 वर्ग किलोमीटर।
लेकिन इसका समुद्री आर्थिक क्षेत्र लगभग 14 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।
और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। सेशेल्स का कुल समुद्री आर्थिक क्षेत्र
भारत की राजधानी दिल्ली के क्षेत्रफल की तुलना में लगभग 944 गुना ज्यादा है।
यानी आबादी कम होने के बावजूद ये देश एक बहुत विशाल समुद्री क्षेत्र पर अपना अधिकार रखता है।
सेशेल्स अफ्रीका के पूर्वी तट से लगभग 1,500 किलोमीटर दूर हिंद महासागर के पश्चिमी भाग में है।
आप दुनिया के नक्शे में देख सकते हैं कि सेशेल्स कहां पर है।
हिंद महासागर दुनिया के सबसे व्यस्त सी रूट्स में शामिल है।
और भारत का लगभग 95% समुद्री व्यापार हिंद महासागर के इसी रास्ते से होता है।
सेशेल्स हिंद महासागर में जिस जगह पर स्थित है, उस रास्ते से
यूरोप, पश्चिम एशिया और अफ्रीका से हजारों जहाज एशिया के अलग-अलग देशों में जाते हैं।
इसलिए भारत के इस देश के साथ अच्छे रिश्ते होने पर भारतीय जहाजों के लिए इस इलाके में आना-जाना और आसान होगा
और ज्यादा सुरक्षित होगा।
हर भारतीय जहाज सेशेल्स के पास से नहीं गुजरता, ये सच है।
लेकिन हिंद महासागर में किसी भी संकट या आपात स्थिति में इस देश में
हमारे जहाज रुक सकते हैं या फिर उससे मदद ले सकते हैं। यानी कुल मिलाकर ये जो देश है ये हमारे लिए महत्वपूर्ण है।
इसके साथ अच्छे संबंध हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
और आज आजकल आप देखते हैं,
जैसे होर्मुज को आप देख लीजिए।
होर्मुज के रास्ते को कैसे ईरान ने एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर लिया।
इसलिए ऐसे छोटे-छोटे देश, ये रास्ते भी आगे चलकर बहुत महत्वपूर्ण होंगे।
और इस तरह से इस छोटे से देश की मदद से
भारत इस विशाल समुद्री रास्ते पर एक बेहतर तरीके से अपनी नजर रख सकता है और किसी भी खतरे से निपट सकता है।
यानी सेशेल्स से दोस्ती भारत के व्यापार और समुद्री सुरक्षा दोनों के लिए बहुत फायदेमंद है, जरूरी है।
पिछले दो दशक में चीन ने हिंद महासागर के क्षेत्र में अपना प्रभाव बहुत तेजी से बढ़ाया है
और श्रीलंका, पाकिस्तान सहित कई देशों के बंदरगाहों और इंफ्रास्ट्रक्चर में चीन ने बहुत ज्यादा निवेश किया है।
इस इलाके में जितने भी छोटे-छोटे देश हैं, चीन चाहता है कि वो उसके प्रभाव क्षेत्र में आ जाएं।
चीन इन्हें लोन देता है, पैसा देता है,
इनका इनके देश में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप कर रहा है, बंदरगाह बना रहा है ताकि ये चीन की टीम में शामिल हो जाएं।
और ऐसे में भारत के लिए बहुत जरूरी है कि भारत भी इनसे अपनी दोस्ती और संबंध बेहतर बनाए।
चीन के प्रभाव को कम करने के लिए ही वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने 'सागर' (SAGAR)
यानी Security and Growth for All in the Region, इस नाम से एक नीति की शुरुआत की।
इसका उद्देश्य हिंद महासागर में सभी देशों की सुरक्षा और विकास को सुनिश्चित करना था।
समय के साथ-साथ भारत जो है, इसमें और अपडेट करता चला गया।
और भारत को ये समझ में आया कि सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि इन देशों में विकास भी बहुत जरूरी है।
और प्रधानमंत्री मोदी लगातार सेशेल्स से अपने रिश्ते मजबूत कर रहे हैं।
वर्ष 2015 में भी प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की यात्रा पर गए थे।
और उस समय 34 साल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इस देश की यात्रा की थी।
इसी साल फरवरी में भी सेशेल्स के राष्ट्रपति भारत की यात्रा पर आए थे।
और इस तरह से पिछले कुछ वर्षों में पश्चिमी हिंद महासागर में सेशेल्स भारत का एक बहुत भरोसेमंद पार्टनर बन चुका है।
थोड़ा सा आपको इतिहास भी बताते हैं।
भारत और सेशेल्स का इतिहास बहुत पुराना है, आज का नहीं है।
वर्ष 1770 में फ्रांस ने जब इस देश पर अपना कब्जा किया,
तो वहां भारत के भी पांच लोग बस गए थे।
19वीं सदी में ब्रिटेन के शासन के दौरान
बिहार से काफी बड़ी संख्या में लोग सेशेल्स जाकर बसने लगे।
फिर 20वीं सदी से तमिलनाडु और गुजरात से भी, 20वीं सदी में, बड़ी संख्या में भारतीय व्यापारी और मजदूर सेशेल्स पहुंचे।
आज वहां की कुल आबादी में लगभग 10% लोग भारतीय मूल के हैं।
और इस देश के पूर्व राष्ट्रपति वेवेल रामकालावन,
ये भी, इनके जो पूर्वज हैं, ये भी बिहार के ही रहने वाले थे।
इसलिए भारत के साथ सेशेल्स के जो संबंध हैं, ये बहुत पुराने हैं।
अब हम आपको...
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