Protests and Police Response in Delhi

पिछले डेढ़ दिनों में, सर कि कुछ ऐसे वीडियो भी आए हैं

जिसमें दिल्ली पुलिस के जवानों को या आरएएफ के लोगों को भी दौड़ाकर पीटा जा रहा है।

और इस वजह से आंदोलन की नैतिकता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

कहा जा रहा है कि क्या सीजेपी लीडरशिप के कंट्रोल में है पूरी तरह से आंदोलन?

देखिए, हमारा कॉल है जंतर-मंतर का।

जंतर-मंतर पे जितने भी लोग हैं, सब हमारे कंट्रोल में हैं।

इसके आसपास के लोग भी जो हैं, वो हमारे कंट्रोल में हैं।

लेकिन, मैं आपके माध्यम से भी बता देना चाहता हूँ जनता को

कि जो असामाजिक तत्व हैं, एंटी-सोशल एलिमेंट्स, वो हमारे प्रोटेस्ट में घुसा दिए गए हैं।

दो हज़ार से तीन हज़ार लोगों का मोबिलाइजेशन हुआ है बीजेपी-आरएसएस के तरफ से।

उनको घुसा रहे हैं और वो यहाँ पे दंगा लाइक सिचुएशन क्रिएट करना चाह रहे हैं।

एंड वही लोग यहाँ पे स्टोन पेल्टिंग वगैरह भी कर रहे।

वो सीजेपी के प्रोटेस्टर्स नहीं हैं।

हम लोग यहाँ पे 30 दिन से ज़्यादा शांतिपूर्ण तरीके से बैठे हैं।

एंड यहाँ पे जितने लोग हैं, इनमें से कोई भी वायलेंट नहीं है।

लेकिन ऐसा क्यों हो रहा है कि इतने सारे पत्थर इतने सेंसिटिव ज़ोन में मिल जा रहे हैं?

ये बताना चाहिए पुलिस को सबसे पहले।

कि इतने सारे पत्थर आ कहाँ से रहे हैं?

आपको पता होगा, 19 तारीख के रात को हम लोगों ने एक वीडियो जारी किया

जहाँ पे एक ट्रक मिला, पुराना सा ट्रक, उसमें बहुत सारे बोरियाँ थे, उसके अंदर पत्थर मिले।

हमने पुलिस को टैग भी किया था। हमने पुलिस को बोला भी था, कोई Action नहीं हुआ।

सुबह जब डीसीपी साहब आए न्योता लेके गवर्नमेंट का, तब हमने उनको बताया

कि ऐसा-ऐसा क्या है? ये आप लोगों का इंटेलिजेंस फेलियर नहीं है?

ये सिक्योरिटी फेलियर नहीं है कि प्रोटेस्ट साइट के इतने पास आप एक वैन को अलाउ कर रहे हो जिसमें पत्थर ही पत्थर है?

तो वो दौ- दौड़ के गए एंड उन्होंने देखा कि क्या है।

फिर बोलते, "ओह, ये तो कंस्ट्रक्शन के का मटेरियल है।"

सब पत्थर ही पत्थर, वो भी ए- इतने बड़े-बड़े पत्थर, वो कौन से कंस्ट्रक्शन के हैं?

तो ऐ- कौन कर रहा है, ये दिल्ली पुलिस को जवाब देना चाहिए।

देखिए, पूरे देश भर में आंदोलन हो रहा है।

पूरे देश भर का रिस्पांसिबिलिटी हम नहीं ले रहे हैं।

हम लोगों का रिस्पांसिबिलिटी है दिल्ली, जंतर-मंतर, यहाँ पे क्या हो रहा है आसपास में।

वो हम लोगों के कंट्रोल में है।

बाकी, हम लोग ज़रूर अपील कर सकते हैं।

ये गांधी का देश है।

गांधी जी ने पूरे विश्व को पढ़ाया कि प्रोटेस्ट के सामने पीसफुल मोड कैसे ऐड होता है।

इन सिद्धांतों पे हमको इस आंदोलन को आगे लेके जाना है।

ये हम सभी का आंदोलन है, हर युवा का आंदोलन है।

हमें वालंटियर बनके, रिस्पांसिबिलिटी लेके

ऐसे असामाजिक तत्वों को आइडेंटिफाई करना है एंड पुलिस वालों को देना है

एंड साइड में उनको हटाना है।

वो हमारे मूवमेंट को डिरेल करने का कोशिश कर रहे हैं, इनसे बचें

एंड शांतिपूर्ण तरीके से इस मूवमेंट को आगे बढ़ाएँ।

End of transcript · 516 words

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