Government Priorities and Student Housing Issues
सरकार को यह लगता है कि सांसदों की संख्या बढ़ाना जरूरी
है। सरकारों को यह लगता है विधायकों की संख्या बढ़ाना जरूरी है या
विधायकों की तनख्वाह या salary बढ़ाने के लिए हां में bill pass होता है, एक
भी विरोध में नहीं जाता, तुरंत होता है क्योंकि वह उनकी प्राथमिकता
में है।
सरकारों की प्राथमिकता में ही नहीं है कि इन बच्चों के लिए hostels बनाए जाए। इन
बच्चों के लिए रहने की व्यवस्था बनाई जाए ताकि वह इन PGs के जाल में ना फंसे।
क्योंकि सरकार की प्राथमिकता में ही नहीं है। ये बच्चे फिर PG में आते हैं।
इनके सामने villain दूसरा हो जाता है। कौन सा PG owner?
क्योंकि वो है already। लेकिन जो इसको रोक सकता है वो
कहां है? सवाल ये है। सवाल इसके आगे का है कि
भई अगर इन बच्चों को hostel मिले तो पागल हैं वो PG में आकर रहेंगे?
वो student इस देश की least priority में आता है। क्यों आता
है? कि इंसान तो लालच का पुतला है। जैसे ही उसको
लगता है कि कितना
पैसा खींच सकते हो। होता क्या है यहां चार चार floor की इजाजत होती
है और ये पीछे से बनाते हैं और पीछे से बनेगा कि
ताकि बाहर से न दिखे। तो करते क्या हैं, जैसे एक लिंटर डाला। अगले
दिन सिपाही मौके पर, सिपाही मौके पर आएगा। लाख रुपए
दिया। अब सिपाही अकेले लाख रुपए तो ढकारेगा नहीं। कहां तक जाएगा आप समझते
रहिए। फिर अगले दिन MCD वाला आएगा। लाख रुपए उससे भी लिया। काम
चालू। रात में काम चलेगा यहां, construction होगा,
illegal construction होगा, बनेगा
सब कुछ। और आप सोचिए कि जब वो दो लाख तीन लाख PG owner
भ्रष्टाचार में दे रहा है तो वसूलेगा किससे?
वो इन बच्चों से वसूलता है। इन बच्चों का खून चूसता है। इन बच्चों को trap
में फंसाया जाता है क्योंकि-- और ये बच्चे फंसते क्यों हैं?
यहां पे आती है सरकार की जिम्मेदारी। फंसते इसलिए हैं क्योंकि इनके पास hostel नहीं
है।
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