Voter List Issues in Karnataka
तुमको पता है कि हमारे देश का मरा हुआ voter भी इतना जागरूक है कि voter list से अपना
नाम कटवाने के लिए वह form 7 भर रहा है। The Hindu की ऋषिता खन्ना की report देखो,
जिसमें कम से कम 37 voters ने स्वयं form 7 भरा है। यह बोलते हुए
कि हम मर चुके हैं तो हमारा नाम voter list से काट दो। 334 pairs
मतलब 668 लोगों ने एक दूसरे का नाम कटवाने के लिए form 7 भर डाला है। इस
basis में कि दूसरा बंदा या बंदी तो मर चुका है तो इनका नाम काट दो और ऐसे हर
एक case में एक दूसरे का नाम कटवाने वाले एक ही booth से आते हैं। जैसे कर्नाटक
के व्यतारणपुरा में 25 साल की के.एन.
सुधा ने अपना ही नाम कटवाने के लिए form 7 भर दिया। तो इस पर BLO ने सफाई दी
है कि वह form श्रीकांत का नाम कटवाने के लिए उसकी wife सुधा ने भरा है। पर BLO यह
नहीं समझा पाई कि उस voter list में सुधा का नाम तो सुधा है, पर श्रीकांत का नाम
भी सुधा कैसे हो गया। जैसे 30 साल के संदूरा हनुमंता ने भी अपनी मौत के कारण
voter list से अपना ही नाम हटाने के लिए form 7 भरा हुआ है और senior poll officer
के मुताबिक ऐसा किसी software glitch के कारण हुआ होगा। और BLO का कहना है कि हमको
तो पता ही नहीं कि ऐसा कोई form भी भरा गया है। जैसे मनीष गौड़ा आर ने भी form 7
भरा है, जिसमें उसका serial number 416 लिखा हुआ है।
पर मजे की बात पता है,
उस polling station में voter ही 415 हैं। जैसे 8 जून को प्रभाकर रंगा
मलाज form 7 भरकर कहते हैं कि मलान मलाज की death हो चुकी है। फिर मरे
हुए मलान मलाज 9 जून को form 7 भरकर कहते हैं कि प्रभाकर रंगा मलाज की
death हो चुकी है तो इनका नाम voter list से काट दिया जाए। गजब यादना है यार। ऐसे ही
11 जून को मल्लिकार्जुन ने वीरम्मा को और 12 जून को वीरम्मा ने
मल्लिकार्जुन को मरा बताकर voter list से नाम कटवाने के लिए form 7 भर डाला।
और इसमें से ज्यादातर forms को कर्नाटक में SRA शुरू होने के just पहले भरा गया
था। पर कुछ cases में उसके बाद भी भरा गया। भाई vote चोरी को लेकर
ज्ञानेश्वर कुमार का इस्तीफा हो या न हो, पर incompetence और इस तरीके की लापरवाही को
लेकर तो जरूर होना चाहिए। ये क्या चल रहा है बे कि मरे हुए लोग तक form भर दे रहे हैं
और तुम तुम्हारा so called software पकड़ भी नहीं पा रहा है।
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