Discussion on Women's Safety in India
कभी-कभी मुझे लगता है इस देश में इतने rape होते हैं, कोई कुछ करता क्यों नहीं है?
पर फिर समझ आता है कि जिस देश में MLA, MP पर rape charges हों,
जिस देश की police rapist हो, जिस देश के religious leaders rapist हों,
उस देश से तुम उम्मीद भी क्या कर सकते हो?
ऊपर से नीचे तक हर कोई तो rapist या rapist mentality का है। जिसको कानून
बनाना है, वो rapist है। जिसको कानून implement करना
है, वो भी rapist
है। तो कौन करेगा women safety की बात?
भले ही इस देश की राष्ट्रपति एक महिला है, भले ही इस देश की राजधानी की मुख्यमंत्री एक
महिला है, भले ही इस देश में जिनकी सरकार है उसमें MP,
MLA महिलाएं हैं,
पर वो बात नहीं करती हैं women safety की। पता है क्यों?
क्योंकि उन्होंने शायद अपनी ही तिजोरी भरनी है। क्योंकि उन्हें फर्क नहीं पड़ता।
उन्हें लगता है हम safe हैं तो सारी दुनिया safe है। हम क्यों ही बात करें किसी
की। मैथाली ठाकुर का तो बयान आता है कि रात को 3:00 बजे भी बिहार में
निकलो तो मैं safe feel करती हूं। बहन आपकी safety की बात नहीं हो रही है यहां।
बिहार की महिलाओं की safety की बात हो रही है।
आप 20 guard के साथ चलती हैं, करोड़ों की गाड़ियों में चलती हैं आप। आप
MLA
हैं। अगर आप भी safe नहीं हैं तो फिर कौन होगा?
और हम क्या जानें आप safety किसको कहती हैं?
हमारे लिए तो किसी की चापलूसी करना मजबूरी होता है। आपके लिए शायद safety होता
होगा।
कंगना राणावत की तो बात ही क्या करनी है। एक virtual setting की ad देख के उन्हें
संस्कृति याद आ जाती है। यहां real life में बुजुर्ग से लेकर बच्चों तक के
rape हो जाते हैं पर वो कुछ नहीं बोलती हैं। जैसे उन्हें तो बोलना ही नहीं
आता। प्रधानमंत्री की तो बात ही क्या करें। मोदी जी को तो भजन कीर्तन करने से
फुर्सत नहीं है। तो तुम्हें लग रहा है कि women safety की बात करेगा कोई?
सुधर जाएगा यह देश? वहम है तुम्हारा।
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