Election Commission Allegations and Controversies
चुनाव आयोग BJP का agent है ये बात साफ हो गया है। क्योंकि जो
बात मैं आपको बताने जा रही हूं इससे आपके होश उड़ जाएंगे। तो होता क्या है?
चुनाव आयोग में तीन member होते हैं दो election commissioner और एक chief
election commissioner और जो भी काम होता है SIR से related तीनों लोगों
की सहमति होनी चाहिए। लेकिन अब यहां पर मुद्दा यह आ गया है कि Gyanesh
Kumar full on attitude में है। वो किसी दो चुनाव आयोग आयुक्त जो है
उनकी बात नहीं सुनेंगे। जो दो और member हैं Vivek
Joshi है और दूसरे Sukhbir Singh Sandhu है। इन दोनों लोगों ने मिलकर पिछले
10 महीने में 14 बार शिकायत करी Gyanesh Kumar से कि इनकी बात नहीं सुनी
जा रही है। सब मनमानी ढंग से हो रहा है। लेकिन भाई साहब नहीं सुने। कभी कभी
तो ऐसा हुआ कि इन दोनों लोगों को एक दिन में चार बार शिकायत करनी पड़ी
और तब भी नहीं सुने भाई साहब। तो फिर Vivek Joshi और जो Sukhbir Singh
Sandhu है वो चले गए cabinet secretary के पास जो की है TV Som
Nathan जी उनसे शिकायत कर दी कि आखिर अंदर ही अंदर क्या खिचड़ी पक रही
है। तो पहला मुद्दा क्या है? Special Intensive Revision के तहत किसका
नाम voter list में रहेगा, किसका नाम voter list में नहीं रहेगा। यह
पूरी तरह
आपके इलाके का जो ERO होता है electoral registration officer उस पर
depend करता है। लेकिन दोनों चुनाव आयुक्त का कहना है कि यह पूरा
पूरा दिल्ली के office में एक software है जिसका नाम ECI net या
और ERO net है। उसने control ले लिया है। उसके ऊपर depend कर रहा है कि
किसका नाम रहेगा, किसका नाम हटेगा। आप सोच कर देख रहे हो मतलब
local
जो officer है उसका कोई लेना देना ही नहीं है। इसी की शिकायत इन लोगों ने
Gyanesh Kumar से की थी लेकिन इनकी नहीं सुनी गई। और आप सोच कर हैरान
हो जाओगे कि अगर मान लो किसी का नाम हट गया है लेकिन local officer जाता
है, वहां पर जांच करता है, पाता है कि वो आदमी है और उसका नाम चढ़ाने
की
कोशिश करता है तो इन लोगों ने system में ऐसा किया है कि उसका नाम चढ़ाने का option
ही
गायब हो जाएगा।
यह बात कौन कह रहा है? चुनाव आयुक्त जो दो और election
commissioner है
ना वो कह रहे हैं Rahul Gandhi नहीं कह रहा है। और तीसरी बड़ी बात यह है कि
जब कोई नया voter अपना नाम जुड़वाने के लिए form six भरता है तो
उसमें बिना किसी कानून या notification के एक नया column जोड़ दिया
गया है। इसमें नए voter से उनके माता पिता, दादा दादी का पिछला
SIR record मांगा जा रहा है। दोनों commissioner ने इसे illegal
बताया। सोच के देख रहे हो क्योंकि नियम बदलने के लिए सरकार का
आधिकारिक notification जरूरी होता है जो जारी ही नहीं किया गया
था। और जो अभी मैं West Bengal वाली बात बताने जा रही हूं उससे तो आपके
पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। तो हुआ क्या?
जब West Bengal वाला मुद्दा आया था, court ने जांच किया था। उसके बाद court ने
बताया था कि हटाए गए voter के नाम वापस जोड़ो। तो उसके बाद
election commission की तरफ से court में appeal दायर की गई थी। तो commissioner
ने सवाल उठाया कि यह case file का order किसने दिया था।
किसने सवाल उठाया? commissioner ने। क्यों?
क्योंकि इसकी जानकारी ना तो आयोग के सदस्यों की थी और ना ही जो
state के chief electoral officer को। इस SIR
process के चलते 13 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं या फिर उनको
flagged mark कर दिया गया है। तो Gyanesh Kumar बेटा
कुर्सी की पेटी बांध लो, ज्यादा दिन टिक नहीं पाओगे। वो क्या है ना
पूरी दाल
काली हो गई और पानी सर के ऊपर बहने लग गया है।
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