Critique of Bollywood's Social Impact
अगर मुझसे कोई पूछे कि हिंदुस्तान की बर्बादी में
सबसे ज्यादा रोल किस विधा का है, तो मैं कहूंगा बॉलीवुड फिल्मों का, हिंदी फिल्मों का।
आप हिंदी फिल्मों में देखते होंगे एक हीरो होता है,
50 लोगों को मार के भगा देता है, ठीक कर देता है,
व्यवस्था में सारी चीजें फिक्स कर देता है। पर मैसेज देता है जनता में कि
एक व्यक्ति काफी है सिस्टम को ठीक करने में।
और इस सिस्टम में कोई प्रॉब्लम नहीं है, आप में समस्या है,
हमेशा ये मैसेज जाता है। इन्हीं बॉलीवुड अभिनेताओं को
आप गुटखे का प्रचार करते देखते हैं।
अजय देवगन, शाहरुख खान, अक्षय कुमार जैसे लोग
खुद अपने जीवन में कभी वो गुटखा खाते आपको नहीं मिलेंगे।
इन्हीं बॉलीवुड के अभिनेताओं को आप देखते होंगे ये कोल्ड ड्रिंक्स का प्रचार करते हैं।
अपने निजी जिंदगी में इतना शुगर कभी नहीं खाएंगे।
लेकिन आपको बताएंगे कि नहीं-नहीं कोल्ड ड्रिंक पिएंगे तो
पहाड़ पार कर जाएंगे, नदी पार कर जाएंगे, पुल पार कर जाएंगे।
इन्हीं लोगों को आप देखते होंगे ये जुए का प्रचार करते हैं,
खुलकर जुए का प्रचार करते हैं और अपनी निजी जिंदगी में शायद कभी वो काम नहीं करेंगे।
इसलिए ये फिल्मों के अभिनेता हो सकते हैं, रील के अभिनेता हो सकते हैं,
लेकिन रियल में एक्चुअली ये विलेन हैं।
ये हमेशा साबित करते हैं कि व्यवस्था में दिक्कत नहीं है, व्यक्ति में दिक्कत है।
आप विदेशों में देखते होंगे कि जो सेलिब्रिटीज होते हैं,
खास करके जो एक्टर्स होते हैं, वो पॉलिटिकली एक्टिव होते हैं।
सरकार को क्रिटिसाइज करते हैं, सरकार की नीतियों पर अपनी बात रखते हैं।
लेकिन बॉलीवुड के किसी अभिनेता को आप बताइए मुझे
जो सरकार को क्रिटिसाइज करे।
शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान, अजय देवगन
और जो बड़े-बड़े सितारे हैं, ये कभी...
आपने अमिताभ बच्चन, कभी आपने देखा कि इन्होंने कभी
गवर्नमेंट की बात की हो, Government को क्रिटिसाइज किया हो?
इनका सारा नॉलेज, सारा ज्ञान 2014 के पहले था,
जब पेट्रोल के प्राइसेज बढ़ते थे तो ये कूल बनने के लिए ट्वीट किया करते थे।
कोई बता रहा है कि मोदी जी भगवान हैं, सुनील शेट्टी का भी एक इंटरव्यू वायरल हो रहा है।
शिल्पा शेट्टी कह रही हैं कि हिंदू धर्म में उनकी आस्था है।
ये कभी ऐसी चीजें हुई नहीं 2014 के बाद से
जब भारत आजाद हुआ 2014 में दूसरी बार, भक्तों के हिसाब से,
तब से ये चीज नहीं देखने को मिल रही है।
इसलिए देखिए तीन तरह के काम करते हैं ये।
पहली बात जो फिल्में होती हैं, बॉलीवुड फिल्में जो मेनस्ट्रीम सिनेमा होता है,
हीरो दिखाता है कि वो 100 लोगों को हरा सकता है,
तो जनता को ये लगेगा नहीं सिस्टम में प्रॉब्लम नहीं है, व्यक्ति में प्रॉब्लम है।
दूसरी चीज है समाज को पीछे ले जाने वाले लोग होते हैं,
ऐसी-ऐसी चीजों का प्रचार करते हैं जो बहुत नुकसानदेह होती है स्वास्थ्य के लिए।
और तीसरी चीज ये पॉलिटिकली साइलेंट होते हैं।
और पॉलिटिकली साइलेंट होना पॉलिटिकली न्यूट्रल होना नहीं है।
अगर आप पॉलिटिकली साइलेंट हैं तो आप सत्ता के साथ हैं, आप अन्याय के साथ हैं।
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