Discussion on National Duty and Defense

हमें आर्मी में सिखाया जाता है सीमा को दुश्मन से बचाना। देश के लिए मर जाना।

सीमा पर तो हमें मालूम है गोली किस पर चलानी।

यहां जिधर भी देखो दुश्मन ही दुश्मन है और दुश्मन फिर दुश्मन है। फर्क सिर्फ इतना

है एक सीमा के उस पार, एक सीमा के इस पार

और इस पार का दुश्मन कहीं ज्यादा खतरनाक है सर। जो देश को दीमक की तरह चाटता जा

रहा है, खोखला बनाता जा रहा है।

फिर इस दुश्मन से लड़ना हमारा कर्तव्य नहीं है? हमारा हक नहीं है?

और हक के लिए लड़ना कभी गलत नहीं हो सकता।

मैं समझता हूं आर्मी ट्रेनिंग हर एक के लिए compulsory होनी चाहिए। कम से कम जिंदगी का

एक साल देश के लिए देना चाहिए। देना होगा।

मुफ्त में मिली हुई आजादी की वजह से देश को बहुत सस्ता समझ रहे हैं आज के लोग।

End of transcript · 145 words

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