Economic Inequality in India Discussion
यह जरा आप मोदी सरकार के economic advisor संजीव सान्याल की
बेवकूफी देख लो। India के legendary economist John Dreze ने
India में जो economic inequality है उसको एक example से point
out करा कि अगर 100 मजदूर minimum wages पर
10 लाख साल के लिए काम करेंगे तब जाकर वह उतनी wealth attain कर
पाएंगे जितनी आज के time पर गौतम अडानी के पास है। और बजाय इसके
कि इस number को dispute करें संजीव सान्याल या कहें कि इतनी economic
असमानता नहीं है देश के अंदर। वो पलट कर जवाब क्या देते हैं कि John
Dreze के काम को कभी किसी time पर Ford Foundation ने और MacArthur Foundation
ने fund किया था। तो John Dreze Ford के बारे में, Henry Ford के बारे में
MacArthur के बारे में ऐसी बात बोलेगा।
अरे भाई John Dreze Indian citizen है तो वो India के context में ही
बोलेगा। अगर आपको देखना है Ford Foundation जिनको fund करती है वो क्या
बोलते हैं तो आप देखो record उठाकर। पता है आपको Ford Foundation किनको fund
करती है? World Inequality Lab को। जो world का
leading
think tank है inequality के ऊपर। यह Thomas Piketty वगैरह का group। यह
जो आप खबरों में सुनते हो ना top 1% के पास top
0.001% के पास कितनी wealth है, कितनी income है,
bottom 50% के पास कितनी है और top से उठाकर wealth को tax
करके bottom को पकड़ाओ। ये सब बातें बोलती है World Inequality Lab। उनको fund करती है
Ford Foundation। In fact Oxfam America India में भी Oxfam
चला करती थी। यहां तो उनका बोरिया-बिस्तरा बांध दिया FCRA के license वगैरह को लेकर
के। But America में Oxfam अब भी काम करती है जो highlight करती है
inequality को कि कैसे रईसों को और tax करके bottom को पहुंचाओ पैसा
या dollars या जो भी बोलना है आपको। उनको कौन fund करता है?
Bill Gates की foundation, Rockefeller Foundation.
अरे भाई ये तो उल्टा साबित करता है कि ये scholars कितने independent है
कि जो class wealthy की class उनको fund करती है वो
उन्हीं के expropriation की बात करते हैं कि इन पर और tax लगाओ।
जिस समाज में इतनी high asymmetry है, inequality है इतनी high
उसमें billionaires fund तो करेंगे ही। सिर्फ scholars को नहीं universities को
fund
करते हैं। आपको देखना है वो जो scholarly output produce कर रहे हैं वो कैसा
है। वह ध्यान ही नहीं है इसका संजीव सान्याल का। अब यह MacArthur Foundation का
नाम ले रहा है। अरे भाई MacArthur जो बंदा था वो तो conservative बंदा था। वो तो कहता
था government को limited होना चाहिए। सरकार के खर्चे ज्यादा मत बढ़ाओ। Waste
होता बहुत ज्यादा और ज्यादा restrict करो। John Dreze का काम तो है यह बोलना
कि भाई सरकार का participation कैसे expand होना चाहिए। चाहे NREGA के through,
चाहे food security के through। तो कहां की बात कहां जोड़ रहे हैं आपस में। और भाई अगर
Ford Foundation से पैसा लेकर सब चीजें ऐसी vitiate हो जाती है
तो Ford Foundation को invite किसने किया था India में?
Indian सरकार ने। और आपको पता है founding grants दिए थे Ford Foundation
ने IIM अहमदाबाद, Bangalore और Kolkata के। और भी देख लो
किन-किन institutes
को support करा उन्होंने। IIT खड़गपुर से लेकर Punjab Agricultural University को
चाहे Green Revolution को support करना हो। तो ये सारी चीजें बेकार हैं फिर तो।
क्योंकि Ford Foundation की funding आ गई। पता नहीं कहां से उठा के बातें आती है।
संजीव सान्याल को खुद कहां से funding आई है। Rhodes Foundation से
Eisenhower Fellowship। इनको कौन fund करता है?
इन पर भी तो कभी Ford Foundation की funding गई है। यह IDFC Institute में जाया करता
था as a fellow। वहां Ford Foundation ने कभी funding दी थी। क्या बात है बेवकूफ
वाली। हिम्मत है तो John Dreze की scholarship में कमियां निकालो। उनके जैसा
output produce करो। तब हम माने तुम्हें। तुम्हारा Wikipedia page खोल लो। सामने ही
दिखता है कि तुम्हारे scholarship का output कैसा है।
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