Critique of Government Policies and Economy
आप रात को बारह बजे हमें friends बोलकर reel डाल रहे थे ना। अब नहीं है हम दोस्त,
हाँ अब हम दोस्त नहीं हैं।
अब दोस्ती खत्म हो गई।
दोस्ती बहुत
दोस्ती। नोटबंदी के बाद आपने covid में हमारी
इतनी बसें अभी इंतजाम कर रहे हैं। जिन बसों का जब covid में प्रवासी
मजदूर अपने पांव पर चलकर जा रहे थे, तब बसों का इंतजाम नहीं हो पाया
आपसे। आप हमें सिखा रहे हैं कि प्रशासन कैसे चलता है। हम लोग
researchers हैं। हम बहुत सालों से पढ़ते आए हैं। हमें पता है अर्थव्यवस्था का कैसे
भट्टा बिठा रखा है इनकी सरकार ने। यहां पर जितने भी मजदूर भाई हैं, उनसे
पूछिए। जितनी भी बहनें हैं, जितने भी साथी हैं, जो काम करते हैं,
उनसे पूछिए उनके
वेतन बढ़े कि नहीं। जब नोएडा मानेसर में protest होता है और इतने लोग इकट्ठा
होते हैं, तब तो आप लोग आगे नहीं पहुंचते हैं। आप लोग
उसको तो बोल देते हैं
उन्होंने पत्थरबाजी करी, इन्होंने यह करा। आपने कभी यह जानने की
कोशिश करी कि
न्यूनतम वेतन minimum wage हमारे देश का जो है वो नहीं बढ़ पाया और
अब आप जिन जिन लोगों के vote कट रहे हैं वो सबसे ज्यादा उसी समाज
से आ रहे हैं। अल्पसंख्यक लोग आपका जो voter base नहीं
है क्योंकि आपका voter base तो संघ में बैठा है ना। उन्होंने तो हर शाखा में हर
university में अपने लोग बिठा दिए हैं तो आम जनता क्या करे?
आपने वेतन नहीं बढ़ाया। भुखमरी देश में हमारे सारे index आप press में
हैं। press का क्या हाल है? आप यह बताइए आप press में हैं,
press का क्या
हाल है आज की date में।
157 नंबर पर है। एक वक्त था जब NDTV जैसे channels पर चलता
था। बिहार में क्या चल रहा है, शिक्षा की क्या व्यवस्था मतलब किस तरह से
हमारे।
रवीश कुमार थे। रवीश कुमार से। रवीश कुमार अभी भी अपना काम कर रहे हैं। तो हम तो रवीश
कुमार को सुनने वाले लोग हैं।
क्योंकि अडानी भाई है ना।
अंबानी और अडानी ने कोई TV channel छोड़ा है, कोई port नहीं छोड़ा है, देश
में कोई airport नहीं छोड़ा है, कोई dock नहीं छोड़ा है।
सारे power plant जो एक time पर state के हुआ करते थे,
जिसमें सरकार का एक role रहा करता था, उसका इतना तेजी से
निजीकरण करा गया है। आज हम सब जो यहां पर खड़े हैं, हम
एक एक घर में स्वास्थ्य को लेकर अगर दिक्कत हो जाए ना हम सब हमारा
bank balance यूं गिरेगा और यह हमें बोलते हैं कि हमें प्रदर्शन में आने के पैसे
प्रदर्शन में आने के पैसे नहीं चाहिए। हमें एक dignified job चाहिए। देश
में हमारे पास है, लेकिन हमारे बहुत सारे साथियों के पास नहीं
है। जैसे
ही attack करते हैं, बोलते हैं कि आप क्यों इनके हक के लिए बोल
रहे हैं। क्योंकि इनके
लिए सबसे खतरनाक यह है जो लोग अपने देश के
साथियों के साथ खड़े होकर बोले कि देखिए मेरा हक ठीक है, इनके हक का क्या होगा?
सबसे ज्यादा खतरा उन्हें उन्हीं लोगों से है।
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