Controversial Figures in Indian Politics
जॉर्ज सोरोस। ये वो नाम है जो दुनिया भर के
लोकतंत्रों को अस्थिर करने के लिए अरबों डॉलर पानी की
तरह बहाता है। और भारत में इस सोरोस की संस्था Open
Society Foundation का global चेहरा कौन था?
सलिल शेट्टी। वही सलिल शेट्टी जो Amnesty
International का भी मुखिया रहा और जिसने भारत की छवि को दुनिया
भर में बदनाम करने का कोई मौका नहीं छोड़ा।
लेकिन कहानी सिर्फ सलिल शेट्टी तक सीमित नहीं है।
असली खेल तो इस नफरत की विरासत के पीछे है जो उसे
अपने पिता से मिली थी।
सलिल शेट्टी के पिता थे VT राजशेखर, जो दलित
Voice नाम की एक बेहद चरमपंथी पत्रिका चलाते
थे। राजशेखर का पूरा जीवन भारत को अंदर से
तोड़ने, जातियों के बीच नफरत की दीवार खड़ी करने
और देश में अलगाववाद फैलाने में बिता था। 1986
में इस जिहादी मानसिकता के राजशेखर पर आतंकवाद
विरोधी कानून TADA भी लगाया गया था और उसे गिरफ्तार भी किया गया
था।
यह वही VT राजशेखर शेट्टी है जिसने आतंकवादी
संस्था SIMI के 1991 conference का agenda लिखा,
जिसमें हिंदुओं के कत्लेआम की बात कही गई थी।
गजवा-ए-हिंद के जरिए देश का इस्लामीकरण करने वाली
terror organization के लिए जिसका योगदान रहा है, उस
नफरती विरासत निकले हुए सपूत का नाम सलिल शेट्टी है
और इसी सलिल शेट्टी से गले मिलते हुए आपको राहुल गांधी
दिखाई देंगे। योगेंद्र यादव दिखाई देंगे। अभिजीत दिगके
दिखाई देगा। क्या राहुल गांधी का रिश्ता इनसे है?
क्या योगेंद्र यादव का रिश्ता इनसे है?
क्या अभिजीत दिगके का रिश्ता इनसे है?
यह एक पूरी टोली है, एक सोची समझी toolkit है
जो विदेशी पैसों के दम पर भारत के लोकतंत्र, उसकी
संस्कृति और सुरक्षा पर सीधा प्रहार कर रही
है। अब फैसला आपको करना है दोस्तों। क्या
हम ऐसी ताकतों को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने
देंगे?
क्या विदेशी ताकतों के टुकड़ों पर पलने वाले ये लोग देश
का भविष्य तय करेंगे?
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