Protests and Police Response in India
आप लोग क्या BJP की नौकरी करना शुरू कर दी है क्या आप लोगों ने?
आप लोग हमारे democratic rights को protect करने के लिए वर्दी पहने थे ना?
आप लोग गुंडों को protect कर रहे हैं, यह है आप लोगों की
असलियत। पूरी ताकत, पूरी ताकत आप लोगों ने झोंक दी
है कि protest न हो पाए। इतना डर, यह मोदी
शाह का डर है तो आप लोग यहां क्यों खड़े हैं?
गुलामी आप लोग करने लगे हैं। हम लोग क्या कह रहे हैं, हम लोग peacefully बैठ जाएंगे
side में जाकर। क्यों रोक रहे हैं आप लोग हमको?
peacefully हम लोग बैठना चाहते हैं। यहां कोई traffic jam नहीं हो रहा
है। यहां पर एक-एक करके, यहां भीड़, गुंडे
attack करते हैं तब आप लोग कुछ नहीं करते हैं। हम लोग
बार-बार आएंगे, कल फिर आएंगे, आज अभी आगे
जाएंगे, हम लोग रुकेंगे नहीं। आप लोगों ने यह जो
democracy का
तमाशा बना रखा है ना, पहले ही democracy जो पैसे वाला है, केवल
उसके लिए थी, पर अब आपने जो बचा खुचा था उसको
भी आप लोगों ने रद्दी का टुकड़ा बनाकर dustbin में डाल दिया है।
इन्होंने protest करने की जगह जंतर मंतर को कहा है कि
वहां जनता protest नहीं कर सकती। वो कहां करेगी?
बुढ़ासी जाकर मरे। यहां हम नारा लगाते हैं तो संसद
विधानसभाओं तक आवाज पहुंचती है। पर ये चाहते हैं कि हम यहां
ना रहें।
जब protestors peacefully आते हैं यहां protest करने, भोंपू शुरू हो जाता है
धारा 163 का। लेकिन जब गुंडे यहां लड़कियों को मार के जाते हैं, सर
फोड़ देते हैं तब ये धारा 163 नहीं होती। वो लोग escort करके इनको लेकर
जाते हैं, vans में लेकर जाते हैं, संरक्षण देते हैं। लेकिन protestors जब यहां
इकट्ठे होते हैं अपने जनवादी अधिकारों के, जो उनका हनन हो रहा है लगातार,
उसके खिलाफ जब आवाज उठाने यहां इकट्ठा होते हैं, रोज इनकी यह
routine का काम हो गया है कि रोज आते हैं, उनको मारते हैं, घसीटते हैं,
बसों में भरते हैं कोनों कोनों में, पता नहीं कहां कहां दिल्ली के outskirts
में छोड़ के आते हैं। यही दिल्ली पुलिस का भी रवैया हो गया है।
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