Cybersecurity and India's Chip Manufacturing
एक बार ना आप ये वीडियो देख लो।
एक कमिटी में तो
एक एक्स-एचआरडी चीफ,
एक आईटी कंपनी के मालिक
और एक गौमूत्र के विशेषज्ञ भी हैं।
अब ना मैं आपको एक कहानी सुनाता हूँ।
मुंबई में ना एक ब्लैकआउट हुआ था, 12 अक्टूबर 2020 को एक्जेक्टली।
काफी गंदा वाला ब्लैकआउट था, कोविड का पीक टाइम चल रहा था।
गवर्नमेंट ने बताया कि वो ह्यूमन एरर था ऑब्वियसली।
पर फिर एक साल बाद में ना, यूएस की एक साइबर सिक्योरिटी फर्म है, उसका नाम रिकॉर्ड फ्यूचर,
उसने बताया कि इंडिया के कई सारे इंस्टीट्यूशंस पे, स्पेशली पावर ग्रिड,
जो मुंबई में ब्लैकआउट हुआ उससे रिलेटेड, उसपे ना चाइनीज हैकर ग्रुप,
रेडइको नाम से, उसने कई बार साइबर अटैक करने की कोशिश करी है और मुंबई का ब्लैकआउट भी उसी से कनेक्टेड हो सकता है।
पर ऑब्वियसली गवर्नमेंट हो या कंट्रीज हों, उनको बहुत अच्छे से ये बात पता होती है कि
चाइना इतना कॉन्फिडेंट कैसे है या फिर उनके जो हैकर ग्रुप्स हैं इतने कॉन्फिडेंट कैसे हैं
कि वो कर लेंगे ऐसी हैकिंग या फिर उनको कभी कॉन्सीक्वेंसेस फेस नहीं करने पड़ेंगे,
उसका कॉन्फिडेंस इतना ऊपर क्यों है?
क्योंकि उसी दौरान सिर्फ इंडिया के साथ ये नहीं हो रहा था, बहुत सारे कंट्रीज के साथ हो रहा था और यूएस बहुत ज्यादा इनसिक्योर था इस चीज के लिए।
उसी टाइम के दौरान ये पता चला कि चाइनीज कंपनीज जो हैं, प्राइवेट कंपनीज,
वो बहुत सारे उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट्स तो उन्होंने बहुत सारे बेचे ही हैं,
सारे उन्हीं के पास से तो आते हैं, छोटे से लेकर बड़ा ले लो।
फिर पता चलता है कि कई सारे इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट्स के थ्रू एक्चुअली,
जैसे हैकिंग का क्या होता है ना कि हमेशा से वो ऐसी रही है कि सॉफ्टवेयर बेस्ड हैकिंग है या फिर इंटरनेट के ऊपर हैकिंग।
पर पता ये चला कि वो जो बहुत सारे इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट्स थे ना,
उनके अंदर एक चिप होती है जिसको बोलते हैं माइक्रोप्रोसेसर, छोटा सा होता है।
कई सारे ऐसे माइक्रोप्रोसेसर्स में चाइनीज कंपनीज ऐसी मॉडिफिकेशन करते हैं कि
तुम भाई साहब उनके अंदर घुस चुके हो उन कंपनीज के
और जब चाहो तब तुम किल स्विच उसमें दबा सकते हो।
और तुम कभी नहीं पकड़ सकते क्योंकि माइक्रोप्रोसेसर जो होता है ना वो बहुत ही छोटा होता है
और उसमें बिलियंस की मात्रा में ट्रांजिस्टर्स होते हैं।
इंटरनेट वाली हैकिंग को तुम पकड़ भी सकते हो, इसको कैसे पकड़ोगे?
सारे कंट्रीज जो हैं वो इनसिक्योर हो गए।
सबको ये था कि भाई हम तो अपने माइक्रोप्रोसेसर जो हैं वो खुद बनाएंगे किसी भी तरीके से। अब बना नहीं सकते सारे कंट्रीज।
2020 के बाद में इंडिया भी बहुत सीरियस हो गया
और इंडिया ने फाइनली खुद के अपने माइक्रोप्रोसेसर या फिर चिप्स बनाने शुरू करे।
अश्विनी वैष्णव का इंटरव्यू भी है, उन्होंने बोला था कि हम सारी तरीके की चिप्स बना रहे हैं अब।
"Most advanced chips in the world, they are all designed in India."
ताकि कोई हमारे इंटरनल सिक्योरिटी में घुस ना सके
और इसी वजह से ना पूरी दुनिया के काफी सारे कंट्रीज जो हैं वो सोवरेन इंडिया को एक बहुत ही खास एसेट की तरह ट्रीट करते हैं।
मोदी जी बाहर जाते हैं, जापान इंडिया आता है, ऑस्ट्रेलिया तारीफ करता है।
क्योंकि उन्हें पता है कि वो चाइनीज मैन्युफैक्चरिंग पे बहुत ज्यादा डिपेंडेंट नहीं हो सकते, भरोसा नहीं है, इंडियन पे हो सकते हैं।
लेकिन ये सारा कुछ, चाहे वो इंडिया की सिक्योरिटी हो कि भाई हम खुद की chips बना रहे हैं
या फिर हम खुद के इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट्स के बहुत सारी मैन्युफैक्चरिंग शुरू करेंगे,
इन सारी चीजों का सार जो है वो एक ही चीज पे आता है, चिप।
और उस चिप की डिजाइनिंग और फैब्रिकेशन
और सिक्योरिटी स्पेशली, उसके लिए कौन बंदा है जो लीडरशिप में है, पता है आपको?
आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर वी. कामाकोटी,
जिसका प्रियंका गांधी मजाक उड़ा रही हैं।
Do you think it's a coincidence?
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