Mumbai Court Ruling on Political Criticism
मुंबई हाई कोर्ट में जस्टिस जामदार ने एक बहुत ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि अमित शाह की आलोचना या बीजेपी की आलोचना देश की आलोचना नहीं है।
एक्चुअली हुआ क्या कि मुंबई में एक सईद नाम के व्यक्ति ने अमित शाह मुर्दाबाद, बीजेपी मुर्दाबाद का नारा लगाया था।
जिसके बाद मुंबई पुलिस ने उस पर एफआईआर करके उसको एक साल तक शहर से बाहर जाने का निर्देश दे दिया।
अदालत ने पूछा कि क्या अमित शाह देश हैं? अदालत ने पूछा कि क्या बीजेपी देश है?
अदालत ने कहा कि पॉलिटिकल पार्टियां हॉर्स ट्रेडिंग करती हैं, विधायक-सांसद खरीदती हैं, तब पुलिस की सक्रियता क्यों नहीं दिखती है?
और कोई एक व्यक्ति अगर किसी भी पॉलिटिकल पार्टी या किसी पॉलिटिकल लीडर की आलोचना कर देता है, उसको मुर्दाबाद कह देता है, तो यह कहां देश के खिलाफ हो जाता है?
किसी व्यक्ति के खिलाफ बात कहना अलग है, देश के खिलाफ बात कहना अलग है।
जस्टिस जामदार ने आगे कहा कि भारत सरकार इस देश के लोगों को गुलाम बनाना चाहती है।
वह चाहती है कि इस देश के नागरिक जो वह चाहे वही करें, प्रोटेस्ट ना करें, सरकार की आलोचना ना करें।
जबकि भारत का संविधान आर्टिकल 19 इस देश के नागरिकों को यह अधिकार देता है कि अगर वह सरकार के किसी फैसले से सहमत नहीं हैं,
अगर वह फैसला सामाजिक रूप से किसी वर्ग को प्रभावित कर रहा है,
तो उनके पास यह अधिकार है कि वह सरकार के खिलाफ प्रोटेस्ट कर सकते हैं, सरकार के खिलाफ अपनी बातें कह सकते हैं।
कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि देश में जिस तरह की स्थितियां बनाई जा रही हैं, सरकार का मतलब देश हो गया है। जबकि सरकार और देश में बहुत बेसिक डिफरेंस होता है।
सरकारें बदल जाती हैं, पार्टियों की सरकारें आती हैं, किसी दूसरी पार्टी की सरकार आती है, लेकिन देश वही रहता है।
इसलिए किसी पॉलिटिकल पार्टी को देश बनाना बंद होना चाहिए।
यह जजमेंट बहुत ऐतिहासिक है और दिखाता है कि अगर न्यायपालिका की जड़ें मजबूत हों, न्यायपालिका की रीढ़ मजबूत हो, तो देश में...
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