Critique of National Destruction and Inequality
मुझको अपने भयंक की खिताब
दीजिए। देश की तबाही
का हिसाब दीजिए। जख्मी
फजाएं हो गई। जहरीली
घर की हवाएं हो गई।
महंगी शराब से दवाएं हो गई।
आइए अवाम को जवाब
दीजिए। देश की तबाही का
हिसाब दीजिए। मुझको अपने
भयंक की खिताब दीजिए। देश
की तबाही का हिसाब
दीजिए। लोग जो गरीब
थे, हकीर हो गए। आप तो
गरीब से अमीर हो गए।
यानी के हुजूर बेज़मीर हो गए।
खुद को बेज़मीरी का खिताब दीजिए।
देश की तबाही का हिसाब
दीजिए। मुझको अपने भयंक की
खिताब दीजिए। राहतों के
नाम पे कमाई कीजिए।
जेबें अवाम की सफाई
कीजिए। लूट के गरीबों को
भलाई कीजिए। कुछ तो
निगाहों को हिजाब दीजिए।
देश की तबाही का हिसाब दीजिए।
कैसी कैसी देखो योजनाएं खा
गए। बेचकर ये अपनी
आत्माएं खा गए। मार के
मरीजों को दवाएं खा गए।
इन्हें पद्मश्री का खिताब दीजिए
देश का।
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