Legal Challenges Faced by SJP Party
आने वाला वक्त SJP पार्टी के लिए खतरनाक हो सकता है। या तो बोस्टन अमेरिका जाकर जान बचेगी दीपके एंड कंपनी की
या फिर इनको यहां जवाब देना ही होगा। यहां नहीं होगा तो अदालतों में हम दबाव लेकर रहेंगे।
अभी तमाम पुलिस की फैमिलीज़ से इंडिविजुअल केस डलवाएंगे।
आप केस विथड्रॉ कर लेंगे परंतु इंडिविजुअल कैपेसिटी में मुझे पूरा हक है, मैं देश का नागरिक हूं और मुझे अदालत में जाने का हक है। एक-एक खून के कतरे का हिसाब-किताब लिया जाएगा।
इंडिविजुअल कैपेसिटी में हमें अधिकार है जो पहले धारा 156(3) वो BNSS में इसका प्रोविजन है।
हम लोग जा सकते हैं अपनी प्रेयर लेकर। उसमें इनके खिलाफ मुकदमा प्राइवेटली हम लोग दर्ज करा सकते हैं,
बल्कि इनसे क्षति ले सकते हैं। इनसे हम क्लेम ले सकते हैं, कंपनसेशन ले सकते हैं कि मुझे इंजरी हुई
जिस वजह से मैं 6 महीने ड्यूटी पर नहीं जा पाया। मुझे ₹1 करोड़ का जुर्माना इनसे लेकर दिया जाए जिन्होंने इस पर दस्तखत किए हैं।
देखिए, प्रेस रिलीज़ में हमने कोशिश की है कि तमाम चीजों को उजागर किया जाए।
परंतु यह चूंकि एक बहुत ही डेलिकेट मैटर है जो paper मेरे पास है, इसमें अंडरटेकिंग है।
इसका टॉपिक ही है 'अंडरटेकिंग बाय द ऑर्गेनाइजर फॉर जंतर मंतर'।
जब भी कोई डेमोंस्ट्रेशन करने के लिए जंतर मंतर, रामलीला Ground या बॉर्डर पर जाता है तो उसको अंडरटेकिंग देनी होती है।
परंतु यह अंडरटेकिंग, यह दिल्ली पुलिस की अंडरटेकिंग नहीं है। यह सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया की डायरेक्शन है
जो कि रिट पिटीशन, क्रिमनल रिट पिटीशन 1153 ऑब्लिक 2017,
2017 की एक गाइडलाइंस थी, उसके आधार पर दिल्ली पुलिस ने एक एसओपी बनाई
48/2022। उसमें तमाम चीजें ऑर्गेनाइजर को सिग्नेचर करके देनी होती हैं
कि मैं इन सब चीजों को एडहेयर करूंगा, इन चीजों को मानूंगा और कानून को मानना पड़ेगा।
इसमें जो इंपॉर्टेंट पॉइंट हैं, चूंकि 22 पॉइंट हैं, मैं आपको इंपॉर्टेंट पॉइंट बता देता हूं।
इसमें जो सबसे इंपॉर्टेंट पॉइंट है, पांच नंबर पर है, उसमें लिखा है कि मैं जो भी है,
'ऑर्गेनाइजर शैल एनश्योर दैट धरना डेमोंस्ट्रेशन विल बी इन ऑर्डरली मैनर'। ऑर्डरली मतलब बिल्कुल एक सही तरीके से, कानूनी तरीके से इसको चलाया जाएगा।
उसके अलावा छठा पॉइंट है कि 1000 से ज्यादा गैदरिंग मैं नहीं होने दूंगा।
यह जिम्मेदारी ऑर्गेनाइजर पर आयद होती है।
उसके अलावा इसमें कंडीशन नंबर नाइन है कि यह धरना केवल 10 से 5 के बीच में होगा, जिसका इन्होंने पहले दिन से ही उल्लंघन किया।
उसके अलावा एक चीज है कि जो भी बैनर, फ्लैग जो कुछ भी होंगे, उनकी लंबाई-चौड़ाई कितनी होगी, 9 फीट/6 फीट होगी
और फ्लैग, बैनर, स्टिक्स प्योरली फॉर डिस्प्ले, केवल आप दिखाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं,
जैसे दिल्ली पुलिस महासंघ को दिखाने के लिए किया है। पर आप उसका मिसयूज नहीं कर सकते।
कोई उसमें ऐसी बात नहीं लिख सकते जो किसी की भावनाओं को हर्ट करती हों,
किसी को गलत साबित करती हों, किसी विदेश के बारे में बात नहीं लिख सकते। इस तरह की चीजें हैं।
उसके अलावा इसमें एक और सबसे इंपॉर्टेंट पॉइंट है, 'आई एंड अदर ऑर्गेनाइजर्स शैल एनश्योर',
सभी ऑर्गेनाइजर्स पर है, चाहे वह दीपके थे, चाहे जितने उनके सहयोगी थे,
'शैल एनश्योर दैट नो पार्टिसिपेंट शैल मेक प्रोवोकेटिव स्पीचेस'। प्रोवोकेटिव स्पीच नहीं करेंगे
और 'यूज़ लैंग्वेज कैलकुलेटेड और लाइकली टू इन्फ्लेम पैशन ऑफ़ क्राउड और इनसाइट देम'।
कोई भी ऐसी बात नहीं बोल सकते कि क्राउड को भड़काया जाए।
जिस तरह से उन्होंने कहा 'चलो संसद चलो', उस टाइम मानसून सेशन था 20 तारीख का और उन्होंने इस तरह इसको भड़काऊ माना गया है कि उन्होंने लोगों को भड़काया।
जिसकी वजह से उन्होंने फर्स्ट, सेकंड, third बैरिकेड तोड़कर संसद से मात्र 200 गज की दूरी पर
उनको तमाम बल का प्रयोग करके पुलिस को रोकना पड़ा, जिसमें पुलिस को बहुत क्षति हुई।
हमारे 128 ऑफिसर्स और जवान को चोट लगी है। इसमें इसके अलावा
तमाम चीजें कही गई हैं। आप रिलिजन, रेस, प्लेस ऑफ़ बर्थ, रेजिडेंस, लैंग्वेज, इस तरह की कोई भी चीज आप वहां पर नहीं करेंगे।
परंतु 100% वहां पर वायलेशन हुआ है। ये तमाम चीजें वहां पर हुई हैं।
इसके अलावा जो सबसे इंपॉर्टेंट चीज है, जो 22 पॉइंट के अंदर 21वां पॉइंट है,
'आई शैल बी रिस्पांसिबल टू कीप द फॉलोअर्स अंडर कंट्रोल,
व्हिच फेलिंग व्हिच, आई अलोंग विद अदर्स शैल बी प्रोसीक्यूटेड अंडर द एक्जिस्टिंग प्रोविजंस ऑफ़ लॉ'।
जो कानून के तहत जो भी प्रोविजंस हैं, उनका मैं वायलेशन करता हूं तो मेरे खिलाफ Action लिया जाए।
यह कागज इन्होंने लिखकर दिल्ली पुलिस को दिया हुआ है जो सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुरूप है।
अब इनको हिसाब-किताब देना होगा कि वायलेशंस के लिए ऑर्गेनाइजर को जिम्मेदार ठहराया जाए या मुझे ठहराया जाए या दिल्ली पुलिस को ठहराया जाए। तो आने वाला वक्त
SJP पार्टी के लिए खतरनाक हो सकता है। या तो बोस्टन अमेरिका जाकर जान बचेगी दीपके एंड कंपनी की
या फिर इनको यहां जवाब देना ही होगा। यहां नहीं होगा तो अदालतों में हम दबाव लेकर रहेंगे।
अभी तमाम पुलिस की फैमिलीज़ से इंडिविजुअल केस डलवाएंगे।
आप केस विथड्रॉ कर लेंगे परंतु इंडिविजुअल कैपेसिटी में मुझे पूरा हक है, मैं देश का नागरिक हूं और मुझे अदालत में जाने का हक है। एक-एक खून के कतरे का हिसाब-किताब लिया जाएगा।
- फैमिली मेंबर्स जो अभी कुछ देर पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, जिनकी फैमिली मेंबर्स को चोट आई थी, कोई एसीपी रैंक का था, कोई डीसीपी रैंक का था, वो लोग भी काफी दुखी थे। - बिल्कुल दुखी होने वाली बात है। ये मैंने, आपने एक बैनर देखा, इसमें लिखा है कि 'हम भी, हमारे भी पापा हैं, हम भी किसी के पिता हैं'। तो
सबके पास फैमिली है, सबकी बेटियां हैं, सबके पिता हैं, माता हैं जो पुलिस के अंदर नौकरी करते हैं। लावारिस तो हैं नहीं ये लोग जो हैं।
और इनका हक है कि अपने चीजें जो उनके पति के साथ, उनके पापा के साथ हुई हैं, वो अदालत में जाकर अपनी बात रख सकती हैं।
ठीक है, सरकार करे ना करे, इंडिविजुअल कैपेसिटी में हमें अधिकार है जो पहले धारा 156(3) वो BNSS में इसका प्रोविजन है।
हम लोग जा सकते हैं अपनी प्रेयर लेकर। उसमें इनके खिलाफ मुकदमा प्राइवेटली हम लोग दर्ज करा सकते हैं,
बल्कि इनसे क्षति ले सकते हैं। इनसे हम क्लेम ले सकते हैं, कंपनसेशन ले सकते हैं कि मुझे इंजरी हुई
जिस वजह से मैं 6 महीने ड्यूटी पर नहीं जा पाया। मुझे ₹1 करोड़ का जुर्माना इनसे लेकर दिया जाए
जिन्होंने इस पर दस्तखत किए हैं। तो इसलिए मेरा बार-बार यही कहना है कि अब इनकी दिक्कतें बहुत ज्यादा बढ़ने वाली हैं।
End of transcript · 1,092 words