Debate on India's Independence History
छब्बीस हज़ार की कुर्बानी और आप कह रहे हैं दे दी हमें आजादी।
बिना खड़क, बिना ढाल। तुम्हारा मैं मुंह तोड़ दूं। तुम
मेरे पास आकर
गाओ।
नहीं नहीं साहब आपको हक क्या है? वो छब्बीस हज़ार जो हमारे परिवार,
जो वहां जिनके घर में मातम मना है,
आप उसको भुला सकते हैं कि हमने साहब लाठी खाई, हम Prime Minister
बनेंगे। हम क्या कहते हैं Home Minister बनेंगे। अरे
लाठी तो मेरी भैंस भी खाती है साहब। मेरे गांव में वहां लाठियां पड़ती हैं। अब
उसको क्या हम हर भैंस को यहां बिठाएंगे क्या?
भैंसासुर बनाएंगे किसी को?
देखिए साहब ये, ये दुख की बात ये है। बोले साहब
बख्शी साहब गढ़े मुर्दे क्यों उखाड़ रहे हो?
आज की बात करो ना। Where you are going
depends a lot on where you came from.
आप कहां जा रहे हैं? हम कहां जा रहे हैं?
बहुत हद तक मुनस्सर है। हम कहां से आ रहे हैं साहब?
किस मोड़ से हमने इस, ये, ये गांव का राह पकड़ी?
ठीक है। और इसके लिए अपने अतीत को याद करना जरूरी
है, क्योंकि हमारे अतीत में छुपा हुआ एक
बहुत बड़ा धोखा है। एक
बहुत बड़ा धोखा है। पहले हमें कहा जाता था
साहब आप कहते हैं कि बोस ने आजादी दिलवाई। क्या proof है आपके पास?
तो
रंजन बोरा की जो Historical Journal of India के अंदर एक
article है, जिसमें इसको cite किया गया है। मजूमदार की
एक
किताब है, जिसमें interview cite किया है। interview
cite
किया है कि साहब ये Clement Attlee, Lord Clement
Attlee, Prime Minister of England, 1945 August
1945-1950 जिसके समय ये
transfer of power हुआ। मैं आजादी नहीं बोल रहा।
Have you got me? मैं आजादी नहीं कह रहा साहब। जिसके सामने
ये,
जिसके समय में, जिसके कार्यकाल में ये transfer of power
हुआ,
उसने खुद बात करी Justice PB चक्रवर्ती से। ठीक है। और
उसने कहा जो Subrahmanyam स्वामी जी ने आपको अभी
सुनाया कि साहब आपने भारत क्यों छोड़ा?
1942 की Quit India Movement, अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन
तो fail हो चुका था। 45 में आप विश्व युद्ध जीत चुके
थे। आप तो तीस मार खां थे उस वक्त। आप साहब इतनी जल्दी
उड़नछू क्यों हैं? उसने बोला तीन शब्द Indian National Army,
सुभाष चंद्र बोस।
तीन शब्द।
लेकिन वो भी देखिए साहब शातिर legal दिमाग। उन्होंने वहां नहीं छोड़ी
बात। नहीं तो फिर साहब मुझे ये बताइए कि महात्मा गांधी
की freedom, non violent freedom struggle का आपके जाने
पर क्या impact था?
वो कहते हैं and I quote
Attlee's face twisted into a sarcastic smile
as he spat out the, spat out the words M I
N I M A L, minimal.
ये कौन कह रहा है साहब?
जिसने ये फैसला लिया, जिसने ये हस्ताक्षर
किए। उससे बड़ा कोई चश्मा दीन गवाह आप ढूंढ
सकते हैं तो बता दीजिए। लेकिन हमें बोला गया साहब नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं।
बख्शी साहब If you are a historical scholar how can you?
ये तो, ये तो, ये तो tertiary evidence है।
किसी ने किसी को कहते सुना, उसने record किया, उसने
article में लिखा, आप उसको ला रहे थे भाई। This
is not primary source.
तो Ladies and Gentlemen, देवियों और सज्जनों, मैं कहना चाहता हूं
कि पिछले कुछ दिनों से हमारा INA Trust,
नेताजी सुभाष चंद्र बोस INA Trust और हमारे कुछ सहयोगी, खास तौर
Doctor कल्याण कुमार डे।
किसी दिन हम लोग इस शख्स का इज्जत से नाम लेंगे। इन्होंने
जाकर London में Transfer of Power Archives
में कई सालों का research किया। इन्होंने उसको
लाकर एक छोटा सा monograph बनाया और मेरे पास बेचारे लेकर आए। America
में रहते हैं, वहां काम करते हैं Doctor कल्याण कुमार डे।
बोले General
साहब जरा ये देखिए। साहब मेरे रोंगटे खड़े हो
गए। उन्होंने चिट्ठियां पूरी की पूरी, he did not
cite कि साहब ये document है। वो पूरी पूरी चिट्ठी reproduce कर
दी है साहब। और इनकी बुनियाद पर अब मेरी किताब मैं
लाना चाहता हूं। Bose और गांधी
Who made India free?
दो टूक शब्दों में। साहब हो जाए, फैसला हो
जाए। शास्त्रार्थ का हमें शौक है इस देश में। तो जरा साहब
एक बारी बैठ के फैसला कर लें।
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