Corruption in Infrastructure Projects
हाल ही में मुंबई और पुणे को जोड़ने वाला एक मिसिंग लिंक
जिसकी कीमत ₹7000 करोड़ थी
उद्घाटन के केवल 10 दिन के अंदर खराब हो गया।
यानी ₹7000 करोड़ आम जनता के डूब गए।
महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने इसका उद्घाटन किया था।
ये बीजेपी के शासन में कोई नई बात नहीं है।
बीजेपी के शासन में ऐसे पुल हफ्ते भर में टूट जाया करते हैं,
उसी दिन टूट जाया करते हैं। मैं आपको कुछ उदाहरण बताता हूँ।
बक्सर रेलवे ओवरब्रिज, ₹21-22 करोड़ इसमें खर्चा हुआ था
और 96 घंटे के अंदर उद्घाटन होने के बाद ये टूट गया।
सरकार किसकी है? सरकार भाजपा की है बिहार में।
डुलियाजान असम ओवरब्रिज, 72 करोड़ की लागत से बना ओवरब्रिज था।
हिमंत बिस्वा सरमा ने उद्घाटन किया था।
उद्घाटन करने के 10 दिन के अंदर वो टूट गया।
चित्रकूट ब्रिज, बनने के 3 महीने के अंदर पहली बरसात में बह गया।
₹51 करोड़ खर्च हुए, किसके खर्च हुए? आम जनता के।
ये तो कुछ उदाहरण हैं।
₹7000 करोड़ मुंबई-पुणे जो मिसिंग लिंक है उसको बनाने में लगे,
ये ₹7000 करोड़ किसके थे?
ये आम जनता के ₹7000 करोड़ थे जो अपनी मेहनत से,
अपनी मजदूरी से, लोअर मिडिल क्लास, मिडिल क्लास
टैक्स इकट्ठा करके सरकार को देता है
ताकि सरकार उसके जीवन को बेहतर कर पाए, सिंपल बना पाए।
और सरकारें इतना भ्रष्टाचार करती हैं,
खासकर ये जो सरकार अभी चल रही है,
जो सो-कॉल्ड ईमानदारी का तमगा लेकर सत्ता में आती है, वो इतना भ्रष्टाचार करती है
कि ये पुल 10 दिन भी नहीं चल पाते।
आपने देखा होगा कि अंग्रेजों के बनाए पुल,
ब्रिटिश जमाने के बनाए पुल आज तक जिंदा हैं,
आज तक चल रहे हैं, संचालित हैं।
उसमें ट्रेनें गुजर रही हैं, बसें चल रही हैं, यातायात चल रहे हैं।
और आज आप ताजमहल का मजाक बनाते हो, लाल किले का मजाक बनाते हो,
किसी खास धर्म से उसको जोड़ते हो।
लेकिन उसकी वास्तुकला से कोई सीख नहीं लेते।
आप ये लर्निंग नहीं लेते कि वो आज 500 साल, 600 साल बाद भी कैसे खड़े हैं।
और आप 10 दिन भी नहीं चला पा रहे।
इसका सीधा सा मतलब है कि आप जमकर भ्रष्टाचार कर रहे हो।
क्या कहते हैं आप?
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