Tribute to Atal Bihari Vajpayee
अटल बिहारी वाजपेयी जी ने शायद यह कहा था
कि भारत कोई भूमि का टुकड़ा नहीं है। एक जीता
जागता राष्ट्र पुरुष है। अटल
जी ने कहा था
कि यह वंदन की धरती है, अभिनंदन की धरती
है। यह अर्पण की भूमि है, यह
तर्पण की भूमि है। इसकी नदी-नदी हमारे लिए
गंगा है। इसका कंकड़-कंकड़ हमारे लिए शंकर है।
हम जिएंगे तो इस भारत के लिए और मरेंगे तो इस भारत के
लिए। और मरने के बाद भी गंगाजल में बहती हुई
हमारी अस्थियों को कोई कान लगाकर सुनेगा तो एक ही आवाज
आएगी भारत माता की जय।
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