Discussion on Communal Tensions and Unity
यह मुसलमान का खून। यह हिंदू का खून। बता
इसमें मुसलमान का कौन सा हिंदू का कौन सा
बता? साले बनाने वाले ने इस पर फर्क नहीं किया।
तू कौन होता है फर्क करने
वाला। यह कलम वाली भाई ठीक कहती है। इसकी कड़वी सच्ची बातें तुम्हारे
खोपड़ी में नहीं घुसती। किसने किसको मारा?
किसने किसको जलाया? साला कल तक हम एक दूसरे के त्योहार में शरीक
होते थे। एक दूसरे के
सुख दुख बांटते थे। अपने टखने पर गणपति लेकर काको जाता था।
पानी में गणपति बाप्पा मौरिया काको नाचता
था। अल्लाहुम्मा सल्ली अला अला सैयदना मौलाना,
मौलाना
और सल्लम यह दुरूद शरीफ देने को किसने सिखाया?
अब चंद गद्दारों की साजिश में अपने भाईचारे को दफनाना चाहता
है।
प्रताप मुझे माफ कर दो। मैं बह गया था,
मैं बह गया था। प्रताप मुझे माफ कर दो।
वाह!
यह आए हमदर्दी जताने। साथ में TV वाले,
प्रेस वाले ताकि कल के अखबार में इनकी तस्वीर पहले पन्ने पर
छपे। पहले पन्ने पर छपी हो।
दो दो बूंद खून का दान करेंगे और अखबार में ऐसा हंगामा
मचवाएंगे जैसे गरीबों के लिए इन्होंने अपने खून की नदियां बहाई हो। साले कुर्सी
के लिए अपने बहन बेटी को बेचने वाले जल्लाद लोग है।
मुझे सब ठीक है, सब ठीक है।
तुम्हारे नापाक कदम आगे मत बढ़ाओ, तोड़कर तुम्हारे गले में पहना देंगे।
आज तुमने राम और अल्लाह को मारने की कोशिश की है लेकिन एक बात ध्यान में रखना। हम
भले ही ऊपर वाले को अलग अलग नाम से पुकारते हैं, लेकिन हमारा धर्म एक है,
मजहब एक है, इंसानियत। तुम जैसे पाखंडी लोग धर्म
के नाम पर हम लोगों में नफरत का जहर नहीं फैला सकते।
ऐसी बात करता है। अरे हम लोग गरीब की मदद के लिए आया है।
देखिए भाइयों और बहनों, हमारे हृदय में आप लोगों के लिए
हमदर्दी है, इसलिए हम यहां आए हैं।
अरे नहीं चाहिए तुम्हारी हमदर्दी।
नहीं चाहिए। नहीं चाहिए तुम्हारी
हमदर्दी। क्या गरीब लोग को हमारे खिलाफ भड़का है?
ये ना चलबे, ये ना चलबे।
अरे ना चलबे क्या?
अरे देश भगाओ। अरे public भड़के है। पागल ही तो
है।
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