CJP का समर्थन क्यों घटा? शबनम मौसी और बैंडवैगन इफेक्ट

CJP की top leadership अभी लगभग आठ दिन jail में रहकर बाहर आई है

और कुछ लोगों को हैरानी हो सकती है। CJP को तो जरूर होगी कि

इन आठ दिनों में

आम लोगों ने specially students ने किसी ने इनके support में कुछ खास नहीं किया।

ना कोई online social media movement चली, ना सड़कों पर कोई protest हुए। कुछ भी

नहीं। और हैरानी की बात इसलिए लग सकती है इनको कि कुछ ही हफ्तों पहले CJP

ने एक बहुत ही mega success movement lead की थी

धर्मेंद्र प्रधान के against। जहां इन्होंने सरकार को वाकई घुटनों पर ला दिया था।

सरकार जो है इतनी clueless हो गई थी कि वह इनकी हर बात मानने को तैयार थी। हर

तरीके से इनको appease करने को तैयार थी। स्थिति यह हो गई थी कि JP Nadda जबरदस्ती

इनसे हाथ मिला रहे हैं। यह social media पर धमकी दे रहे हैं कि फिर से protest कर

देंगे तो सरकार तुरंत Supreme Court में जा रही है और जो cases file किए

थे उनको वापस ले रही है। So अब अचानक से ऐसा क्या हो गया है कि यह लोग अब relevant

नहीं रहे?

इसको समझने के लिए दो concept समझने की जरूरत है। एक होता है

popular culture जो कि एक social phenomenon होता है और दूसरा होता है bandwagon

effect जो कि एक psychological phenomenon होता है। So मैं एक छोटे से example से यह

दोनों चीजें explain करने की कोशिश करता हूं। मध्य प्रदेश का शहडोल जिला। यहां

की एक विधानसभा constituency है जिसका नाम है सोहागपुर।

सोहागपुर जब से assembly seat बनी है तब से यहां पर BJP और

Congress ही जीते आए हैं हमेशा से। Except सिर्फ उस एक बार के सन

2000 की बात है। यहां पर by election हुए थे तो उसमें शबनम मौसी

नाम की एक independent candidate खड़ी हुई थी जो कि transgender थी।

तो शबनम मौसी ने जो है घर घर जाकर campaign करना शुरू किया और उन्होंने लोगों से कहा

कि आपने जो है महिलाओं को भी मौका देकर देख लिया, पुरुषों को भी मौका देकर देख

लिया। कोई हालात तो बदलते हैं नहीं। एक बार आप हमें भी मौका देकर देख लो। क्या पता हम

हालात बदल दे।

लोगों को यह बात बहुत अच्छी लगी। थोड़ा सा humorous भी था और बाकी आम लोग तो जो है

विधानसभा level पर तो at least सारे नेताओं से परेशान रहते हैं। ना उन्हें कोई

भाजपा में hope नजर आती है, ना Congress में hope नजर आती है। So

उन्होंने कहा कि

यार बात तो सही है, दे देते हैं vote देने में क्या है?

और धीरे धीरे यह discussions जो हैं offices में होने लगे,

tea stalls पर होने लगे, road side होने लगे,

घरों के अंदर होने लगे और लोगों ने

बातचीत करनी शुरू की। भाई इसी को देंगे, शबनम मौसी को vote देंगे।

और धीरे धीरे वह एक mass movement बन गया और एक independent candidate शबनम

मौसी election जीत गई और काफी बड़े margins से I think 17 हज़ार votes के आसपास।

और भारत की पहली transgender

वह बनी जो कि MLA बनी।

So उसके बाद शबनम मौसी ने काम तो ठीक ही किया। कोई ऐसा major दिक्कत नहीं थी

उनके साथ। तो technically देखा जाए तो शबनम मौसी को अगले election में जो कि तीन

साल बाद था 2003 में उसमें भी जीतना चाहिए था। लेकिन लोगों को शबनम

मौसी के काम से कोई लेना देना नहीं था। उन्हें बस मजा आ रहा था कि

सबक सिखाएंगे नेताओं को। और यह caption अच्छा लग गया कि पुरुष को भी मौका

दिया है, महिला को भी दिया है, हमें भी दीजिए और एक mass movement बन गया

था।

इसलिए उन्होंने जीता दिया। 2003 में उनका वह euphoria खत्म हो गया। इस बार

जब चुनाव हुए तो शबनम मौसी 10th number पर थी। आप सोचिए election जीती,

ठीक ठाक काम किया, लेकिन उसके बावजूद भी जो है अब relevance ही

नहीं रहा। क्योंकि

यह जो हुआ था शबनम मौसी का जीतना इसको pop culture moment

कहा जाता है कि उस particular area में उस समय यही trending में था।

तो सब जो है एक के बाद एक उसके support में आते गए। और जब

किसी movement को कुछ लोगों का support मिलना शुरू होता है तो और लोग उससे जुड़ते

जाते

हैं, और लोग उससे जुड़ते जाते हैं। इसको

bandwagon effect बोलते हैं। अब यह दोनों ही

चीजें आप बार बार नहीं create कर सकते। यह एक ही बार होती है। शबनम मौसी

की वजह से एक बार create हो गया और उसके बाद लोगों का interest खत्म हो गया। फिर 2003

में election हुए तो शबनम मौसी अब कहीं नहीं। और इसके अलावा भी ऐसे और दुनिया भर के

examples हैं। जैसे धनुष का एक song बहुत famous हुआ था Why This Kolaveri।

पूरी पूरी India में वही लोग वही गाना सुन रहे हैं। उसके अपने अपने versions बना रहे

हैं। पागल हो रखी है जनता। अब उस गाने को कोई नहीं सुनता। अगर वो गाना वाकई बहुत गजब

का होता तो आज भी लोग सुन रहे होते। But वो एक pop culture moment था। उस समय

trending

था। लोगों ने सुनना शुरू किया। तो और लोगों ने बनाना शुरू किया और famous होता गया।

वैसे ही एक South Korean singer है। उसका song था Gangnam Style।

वो भी इसी तरह का mass moment था। अब कोई नहीं सुनता उसे।

South की एक

actress हैं जिनके

wink करने वाला एक video बहुत viral हुआ था। अब उनको कोई नहीं जानता। मतलब South

में local industry के लोग जानते होंगे लेकिन Pan India अब discussion नहीं

होता उनके बारे में। So बहुत सारे ऐसे moments होते हैं कि कोई एक particular

incident

के लिए viral हुआ, सब discuss कर रहे हैं और वह euphoria fade

हो गया, matter खत्म हो

गया।

So कुछ ऐसा ही CJP के साथ भी हुआ। CJP

मतलब जनता तो वैसे ही परेशान रहती है। Youth तो वैसे ही anti establishment होता है,

rebel होता है, वैसे ही वह समाज से परेशान रहता है,

idealistic होता है।

इसी बीच में CGI साहब ने जो है cockroach word use कर दिया। दीप के ने जो है बहुत

दिमाग लगाया मानना पड़ेगा। उसने तुरंत cockroach जनता party नाम का एक handle

बनाया

और लोगों ने follow करना शुरू किया।

लोग जुड़ते गए। Bandwagon effect और लोगों ने follow किया और लोगों ने discussion होना

शुरू हो गया। फिर कुछ और लोगों को realize हुआ कि यार यह इसमें तो गजब

potential है तो उन लोगों ने फिर यह handle hijack कर लिया। Mass movement बना

दी। उसी समय जो है Paper leak वाला मुद्दा भी चल रहा था तो इन्होंने बहुत बढ़िया

topic उठाया वहां पर

और अच्छी movement चल रही थी। शुरू में इतना ज्यादा support नहीं था लेकिन,

लेकिन इसको pop culture moment बनाया गया artificially। कैसे?

सोनम वांगचुक fast पर बैठे थे और जब उनकी हालत खराब होनी शुरू हुई I think day 16,

18 के आसपास जब उनके लिए चलना मुश्किल हो गया, जब उनकी videos आ रही थी कि बहुत कमजोर

हो गए हैं तो उसी समय उन videos के साथ में बहुत ही बड़ा

एक social media movement चला जिसमें celebrities और influencers वगैरह इन लोगों

ने एक

साथ मिलकर

post करना शुरू किया, tweet करना शुरू किया कि मर जाएगा उसके बाद

बोलोगे क्या?

और वांगचुक को ऐसे

कमजोर देखना युवाओं के लिए थोड़ा मुश्किल था। Specially

science, maths, STEM जो जिसको बोलते हैं वह stream के जो

students जो आमतौर पर

protest नहीं करते, अपने काम से काम रखते हैं,

उन लोगों ने protest करना शुरू किया।

क्योंकि वांगचुक की image है scientist innovator की और

वह लड़ रहा है एक genuine issue के against।

So लोग support में आना शुरू किया, सड़क पर उतरना शुरू किया, content

बनाया और लोगों ने देखा और लोगों ने join किया तो एक pop culture moment create हो

गया

कि हर आदमी उस movement का part बनना चाहता है। लोग जुड़ते गए, जुड़ते गए, जुड़ते

गए। सरकार को समझ में नहीं आया क्योंकि anticipate नहीं कर रहे थे और एकदम से चीजें

बड़ी हो गई

और उनको पीछे हटना पड़ा जो कि बहुत पहले ही हट जाना चाहिए था। धर्मेंद्र प्रधान ने

काफी पहले इस्तीफा दे देना चाहिए था। लेकिन चलो

हो गया।

अब यहाँ पे CJP leadership को लगा कि ये हमारी वजह से हुआ है, हमारी popularity की

वजह से हुआ है। हम अब नए leader हैं। अब हम देश का भविष्य decide करेंगे।

लेकिन ऐसा नहीं था।

जो भी success थी, ये एक pop culture moment था।

किसी एक नेता या किसी एक चेहरे की वजह से ये नहीं हुआ। लेकिन CJP

leadership को ऐसा नहीं लगता था most likely क्योंकि उनके behavior से अगर आप देखेंगे

तो आपको भी ये realize होगा। क्योंकि

हो गया आपने जो चाहते थे आपने achieve कर लिया। अब

उसके बाद आप थोड़े arrogant हो गए। अगर आप इनका behavior देखिए बाद में तो taunt

मारना, ताने कसना, मजाक उड़ाना, धमकियां देना कि फिर से कि

education minister का इस्तीफा लेके आ रहे हैं। जानते हो हम कौन हैं ऐसे वैसे।

उसके बाद एक और incident हुआ जब Supreme Court में matter चल रहा था कि court cases

जो

हुए थे rioters के against वो वापस नहीं होंगे। तो इन लोगों ने फिर से protest की

धमकी

दी और तुरंत सरकार जो है Supreme Court में चली गई और उन्होंने कहा कि नहीं नहीं वापस

ले लीजिए case. तो वो दूसरी victory थी इनकी। तो अंदर जो है

वो

overconfidence बढ़ता ही जा रहा था कि अब हम जो चाहे कर सकते हैं protest करेंगे और

जनता जो है भर के आनी शुरू हो जाएगी और जो मर्ज़ी करा लेंगे। so ये जो goodwill

इन्होंने generate की थी उस एक genuine reason की वजह से

और ऊपर से इनका जो overconfidence आ गया कि भाई जो कुछ हुआ है वो हमारी वजह से हुआ है।

अब हम देश, हम, हम decide करेंगे कि क्या होना है यहाँ पे।

so उन्होंने जो है उसके बाद इस goodwill को channelize किया एक political topic के

ऊपर vote चोरी, death of democracy जिसको जिसका आम जनता,

आम जनता के लिए वो important नहीं है। आम जनता को वैसे ही मतलब नहीं था। वो

एक moment था उसमें आ गए। अब वो सब अपनी life में वापस जा चुके हैं। तो ये लोग

उतर गए

अपने cadre और अपने support left group के साथ। इनको लगा कि

धरना start होगा, movement start होगा, अ, ये arrest होंगे, police

लाठियां चलाएगी, फिर से videos viral होंगे, फिर से celebrity share करेंगे तो आम जनता

जुड़ेगी ये वो और फिर से सब कुछ होगा। लेकिन कुछ नहीं हुआ ऐसे। police ने जो है चुपचाप

इनको शांतिपूर्वक बैठाना शुरू किया और इनको detain करके court में

ले गए और वहां से इन्होंने bail bond sign कर दिया कि अब हम नहीं करेंगे

protest वगैरह। लेकिन

फिर चले गए protest करने के लिए तो police ने उठा के detain कर लिया। इनको लगा होगा कि

कुछ होगा। जनता उतरेगी लेकिन जनता का काम हो चुका है यार। जनता भूल चुकी है। वो

आगे बढ़ चुकी है। जनता की नज़रों में तुम लोग heroes,

leaders वगैरह नहीं थे। वो एक pop culture moment था। वो खत्म हो गया। और इसको call

out करना क्यों जरूरी है? क्योंकि color revolutions ऐसे ही होते हैं।

आप पढ़ के

देखिएगा color revolution के बारे में कि जहाँ भी regime change आपको करनी होती है,

आप

genuine मुद्दे उठाते हो unemployment, education, crime ये

वो। जनता परेशान रहती है इन सब issues की वजह से। so आप एक mass movement lead

करते हो। जनता automatic आपके साथ आती जाती है, आती जाती है, आती जाती है। आपका एक

support base तैयार हो जाता है और फिर आप उसको use करते हो politically

regime change के लिए उसको, उसका सारा anger divert कर देते हो

incumbent के against

और सरकार को भागना पड़ता है। तो यही कुछ

करने की कोशिश यहाँ भी की गई। एक genuine मुद्दा उठाया गया NEET

वाला। again वो मैं फिर से कह रहा हूँ बहुत सही चीज थी। वो अच्छा किया आप लोगों ने।

ठीक है जो भी है। लेकिन वो जो goodwill आपने generate की उसको आपने कोशिश किया कि आप

divert करके use करेंगे purely political मुद्दे के लिए vote चोरी,

death of democracy। so अब CJP वो moment दोबारा recreate नहीं कर सकती

क्योंकि वो moment इनकी वजह से नहीं हुआ था। again जैसे मैंने कहा वो एक pop culture

moment था जैसे निर्भया case में हुआ था। निर्भया case कोई भारत का पहला rape थोड़ी

था। एक rape incident हुआ और वो media पे सब जगह इतना चला, इतना चला कि

लोग जुड़ते गए, सड़क पे आए। उस सड़क के protest की coverage

media पे हुई तो और लोग

आए। एक mass movement बन गया। लेकिन क्या उसके बाद rape होने बंद हो गए?

rape तो होते ही रहते हैं लेकिन लोग सड़कों पे नहीं उतरते क्योंकि कोई नहीं उतर रहा

है। अगर कोई भगवान न करे कोई और major rape incident हो जाता है और लोग सड़कों पे

उतरेंगे तो उनको दिखा देगी और उतरेंगे। तो mass movement ऐसी ही बनती है देखा देखी में

bandwagon effect और वो pop culture moment बन जाता है। उसकी वजह से चीजें होती

हैं। so once again जो धर्मेन्द प्रधान का इस्तीफा हुआ है वो एक pop

culture moment था। उसमें CJP की वजह से नहीं हुआ। वो

ऐसा नहीं कि वो CJP के leaders जो हैं वो महान leaders बन गए। उसके बाद उनकी वजह से

हुआ otherwise आठ दिन जेल में रहे यार। कोई, कोई,

कोई social media पे कुछ नहीं है। कोई on ground कुछ नहीं है। मतलब हजार दो हजार आम

लड़के तो आने चाहिए थे ना कि जेल के बाहर खड़े हुए हैं protest कर रहे हैं कि छोड़ो

छोड़ो इनको। कोई नहीं।

End of transcript · 2,297 words

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