Judicial Bias and Political Influence in India
आशुतोष और सौरभ अभी तक जेल में बंद हैं और उनका गुनाह सिर्फ इतना है कि
उन्होंने जंतर मंतर पर जाकर तिरंगा लहराया था। कोर्ट उन्हें बेल नहीं दे रहा
है। बहाना मार रहा है कि नहीं यार इस पर बेल नहीं मिल सकती। breach of peace था
फलाना ढिमकाना। लेकिन उसी दिन की यह खबर
देखो। इलाहाबाद High Court ने एक murder convict को
रिहा कर दिया। convict का मतलब समझते हो क्या है?
convict का मतलब होता है एक ऐसा इंसान जिसका गुनाह court में साबित हो गया है। यानी
यह court में साबित हो चुका है कि इस बंदे ने murder किया है। इसकी सजा भी
सुनाई जा चुकी है। लेकिन फिर भी इलाहाबाद High Court ने इसे बेल
दे दी। इसे रिहा कर दिया क्योंकि यह BJP के टिकट से election
लड़ना चाहता है। यह मजाक नहीं कर रहा मैं दोस्तों। देश
में आज law and order का यही हाल हो गया है। खुलेआम जनता का मजाक
बनाया जा रहा है इस पूरे system के द्वारा और यह कोई इकलौता ऐसा case नहीं है। अंकिता
भंडारी murder case में भी जो VIP accused थे दुष्यंत गौतम BJP के
leader उन्हें BJP ने अब सिक्किम का Governor बना दिया
है ताकि अंकिता भंडारी के लिए justice मिलना और भी मुश्किल हो जाए। अब
next to impossible हो गया है। अब देख लो कितने
shamelessly कितने openly अब काम छुपाकर भी नहीं किया जा रहा है,
खुलेआम किया जा रहा है कि ये देखो जनता को जैसे ये कह रहे हो कि हम तो राजा
है, हमारा जो बस चले हम करेंगे, हम murderers को बचाएंगे, बलात्कारियों को
बचाएंगे। जो करना है कर लो। ये आम जनता के मुंह पर
तमाचा मारा जा रहा है खुलेआम और अंधभक्त अभी भी इनके लिए तालियां बजा रहे हैं।
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