कर्नाटक में 61,000 Form 7 और वोटर लिस्ट से नाम कटने के आरोप
पांच अक्टूबर को कर्नाटका की Chief Electoral Officer ने कहा था Form 7 से एक
भी
voter नहीं हटाया गया। Not a single voter। अब देखिए
आज The Hindu का आंकड़ा इकसठ हज़ार Form 7। BJP कार्यकर्ता ने नहीं
Election Commission के अपने अफसरों ने भरे ERO और ARO और
एक भी form में कारण नहीं यानी reason नहीं है। कारण लिखना कानून में जरूरी
है। बिना कारण liable to be rejected और EPIC number check करने पर
नाम पहले ही कट चुके हैं। इतना ही नहीं timeline सुनिए। 24 अगस्त से
23 सितंबर objection का वक्त अफसरों के सिर्फ One thousand nine hundred two Form
7।
deadline के बाद जो कि गैरकानूनी है। 24 सितंबर से 22 अक्टूबर साठ
हज़ार आठ सौ से ज्यादा। सत्रह अक्टूबर को ग्यारह हज़ार। उन्नीस को ग्यारह
हज़ार। इक्कीस को दस हज़ार। आखिरी दिन दस हज़ार। Rule सत्रह कहता
है deadline के बाद की शिकायत shall be rejected रद्द होगी ही लेकिन
रद्द नहीं हुई, नाम कट गए और forms auto generated थे।
system ने
बनाए। जिन voters तक notice नहीं पहुंचा उन्हें ineligible मान लिया गया। यानी
notice नहीं मिला इसलिए नाम चला गया। जो judge है ERO
वही शिकायत करने वाला, जो शिकायत है बिना कारण। जो deadline है
उसके बाद Ninety nine point seven percent और जो नाम कटना था शिकायत से
पहले कट गया। ये Form 7 नहीं है। ये नाम कटने के बाद बनाया
गया एक अजीबोगरीब तरीका है। कहां BBMP South दस
हज़ार। BBMP North आठ हज़ार। Bangalore Urban आठ हज़ार। वही बेंगलुरु जहां
महादेवपुरा है, जहां Aland की SIT ने ज्ञानेश कुमार के
commission से data
मांगा और नहीं मिला। छब्बीस विधानसभा क्षेत्रों में अफसरों के Form 7
voter से ज्यादा। हां, commission कहेगा ये procedural है। One
point zero seven
करोड़ पहले ही हटे। ये Zero point five percent भी नहीं और CEO का पाँच
अक्टूबर का बयान उस दिन गलत नहीं था। आज पुराना है लेकिन pattern
देखिए। Pilbhit में तेरह हज़ार एक सौ पचास नाम बदले technical। बंगाल में
सैंतीस लाख appeals लंबित। दिल्ली में सैंतालीस लाख। कर्नाटका में इकसठ हज़ार
auto generated। हर राज्य में अलग शब्द, अलग कहानी। नतीजा एक
ही है। नाम कट गया। कल कर्नाटका की final raw
आएगी। उसमें इकसठ हज़ार नाम नहीं होंगे और उन्हें यह भी नहीं पता होगा कि
शिकायत किसने की। क्योंकि शिकायत करने वाला उनका अपना ERO
ही था। कारण खाली छोड़ गया और ज्ञानेश कुमार
अठारह दिन से चुप। तो सवाल यह है पाँच अक्टूबर को एक भी voter नहीं
हटाया। छब्बीस अक्टूबर को इकसठ हज़ार नाम कट चुके तो कल
final raw के साथ commission क्या बताएगा?
पाँच अक्टूबर का बयान गलत था या आज का data?
Comment में लिखिएगा। मैं जरूर पढ़ूंगा।
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