Political Protests and Regime Change Discussion
तो अभी तक तो सबको ज्ञानेश कुमार का resignation चाहिए था, लेकिन अब चाहिए
सीधे तख्तापलट। खैर मकसद तो जुलाई से यही
था। कटा तो उनका है जिनको लग रहा था कि यह जो पूरा protest है वह election
commission के खिलाफ है। परत दर परत इन वामपंथियों ने अपनी औकात दिखाई है।
सबसे पहले सौरभ दास press conference करके कहता है कि अगर ज्ञानेश कुमार का
resignation आ भी जाए तो भी रुकना नहीं है, हमारा मकसद सरकार गिराना है। फिर
नेहा बोरा कहती है कि Thank you Bangladesh for inspiring us.
फिर प्रशांत भूषण कहता है कि-
हाँ हम लोग चाहते हैं regime change हो।
फिर अब प्रियंका खरगे भौंकता है कि CJP और Congress एक है।
Congress जनता party है ना Congress party ना।
यानी CJP, Congress और Indy Alliance का एक सोचा समझा
planned plot था, जो कि youth को, आम नागरिकों को एक youth
movement कहकर बेचा जा रहा था। ऐसे तो इन वामपंथियों से राष्ट्रगान नहीं गाया
जाता है, भारत माता की जय नहीं बोला जाता है और आज
तिरंगे का सहारा
लेकर ये लोग नई दिल्ली को ध्वस्त करना चाहते हैं। कभी आपने सोचा है कि इन
वामपंथी दंगाइयों ने Connaught Place को ही क्यों चुना?
Protest करने के लिए, ताकि business affect हो, आम जनजीवन
affect हो। क्योंकि इस देश का जो आम आदमी है वो अपने काम में लगा हुआ था। वो जान रहा
था कि ये नमूने आखिर चाहते क्या हैं। इसीलिए अब ये उस आम
आदमी को economic चोट देना चाहते हैं। और कमाल की बात है कि democracy बचाने
निकला कौन है? प्रशांत भूषण। यह frustrated वामपंथी बुड्ढा
जो 2011 में कश्मीर को भारत से अलग करने की demand कर रहा था।
नेहा बोरा जो ऐसे तो minority rights के लिए लड़ती है, लेकिन जब हमारे
जवान शहीद होते हैं तो ये तालियां बजाती है। सौरभ दास जो उमर खालिद का
support करता है। अभिजीत दिगके जिसके खुद अब Boston के students आकर
खुलासा कर रहे हैं कि कितना बड़ा anti India और anti Hindu इंसान है ये।
When I spoke to him,
dude this guy is the biggest anti-national guy
ever. He hates everything that is happening in the country.
आशुतोष रंका जो कि एक ex पाकिस्तानी senator सानिया निस्तार से fund
ले रहा था। During Operation Sindoor, during Pahalgam attack.
ये compromised लोग ये, ये democracy बचाएंगे, really?
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