Poetic Reflections on Life and Dreams
किसे पूछूं,
है ऐसा क्यों?
बेज़ुबां सा
ये
जहां है। खुशी के
पल
कहाँ ढूंढूं?
बेनिशां सा
वक्त भी यहाँ है।
जाने कितने लबों पे
गिरे हैं।
जिंदगी
से कई फासले
हैं।
फंसी जाते हैं सपने क्यों आँखों में।
लकीरें जब छूटें इन हाथों से यूं
बेवजह। जो
भेजी थी दुआ वो
जाके आसमां
से यूं टकरा गई। के आ
गई है लौट के सदा। जो
भेजी थी दुआ वो
जाके आसमां
से यूं टकरा गई। के आ
गई है लौट के
सदा।
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