Women Warriors in Rajasthan's History
आपको राजस्थान में ऐसा देखने को मिलेगा कि किसी महिला ने अपने आन बान की रक्षा के
लिए मेरे को touch भी नहीं कर दे दूसरा, जोहर कर लिया। आप पद्मावती में जो
देखते हैं रानी पद्मिनी का जोहर पर पुरुष मुझे touch भी नहीं कर पाए। अग्नि में जल
जाऊंगी तो दूसरा touch भी नहीं करना चाहिए। यह तो उनकी वो pureness पवित्रता जिसे हम
कहते हैं वह दिखती है। फिर राजस्थान के history में उतनी की उतनी महिलाओं की
बहादुरी
के किस्से मिलते हैं खूब सारे। हमारे भीलवाड़ा में एक छोटी सी जगह पड़ती है कोसी
थल।
वहां के जो commander थे, उनकी उम्र पाँच साल। पिता की death हो गई
थी। पाँच साल की
उम्र का एक बच्चा वहां पर feudal बनाया हुआ है। उसकी mummy शासन संभाल रही
है। उसकी mummy को जाके message गया। तुम्हारे बेटे के लिए message आया कि युद्ध
लड़ने
के लिए जाना पड़ेगा। जमीन जब्त कर ली जाएगी। उसकी mummy ने सोचा पाँच साल के बेटे को
कैसे भेजा जाए। वो महिला खुद युद्ध लड़ने के लिए जाती है। पुरुष वेष धारण करती है।
युद्ध लड़ने के लिए जाती है। मेवाड़ युद्ध लड़ता है। युद्ध को जीतता है। शाम को जब
घायलों को उठा रहे थे तो उन घायलों में एक महिला मिलती है जिसके तलवार लगी है यहां पर।
इसलिए उसके खून निकलने से उसके बाल पूरे गीले हो गए। एक अंधेरे में जब हाथ डाला एक
सेनापति ने तो उसके बाल हाथ में आए। उसने पूछा यह कौन हो तुम?
जासूस हो? महिला जासूस का काम किया करती थी। को जासूस
के रूप में भेज दी गई हो। उसने
कहा यदि राणा जी को बुलाया जाए तो मैं बात बता दूंगी वरना नहीं बताऊंगी। राणा जी को
बुलाया गया। राणा जी ने उसको बोला कहा कि तुम मेरी बहन लगती हो। तुम्हारे सात खून माफ
कर दिए जाएंगे। सात murder करके तो भी सजा नहीं दूंगा। बताओ सही कौन हो?
उसने कहा मैं कोसी थल के ठाकुर की मां हूं। आपने कहा था कि जो नहीं आएगा उसकी जागीर
जब्त कर ली जाएगी। मैं कभी नहीं चाहती थी कि मेरे बेटे की जागीर जब्त कर ली जाए। राणा
राज सिंह रोने लग गया था। उसने कहा तुम्हारे जैसी महिलाएं जब तक जिंदा है, मेवाड़ का
कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता। हमारे छापोली नाम की जगह पड़ती है
झुंझुनू में। वहां से सुजान सिंह नाम का बीस बाइस साल का लड़का शादी से लौट रहा होता
है और बीच में पता चलता है कि औरंगजेब की सेना खंडेला में मोहन जी का मंदिर तोड़ने के
लिए आ रही है। वो घर नहीं जाता। बीच में रुकता है, सेना से लड़ता है, उस मंदिर को
तोड़ने से बचाता है। वो जो लड़की जो नवविवाहिता है, newly wedded bride है,
जो अभी तक
अपने घर भी नहीं पहुंची है। उसका पति बीच में वीरगति को प्राप्त हो, उसके साथ में सती
हो जाती है। तो राजस्थान की history को इस perspective से देखना चाहिए कि राजस्थान में
महिलाओं की पन्नाधाय कैसे सोच सकता है कि एक महिला पन्नाधाय का सुना है आपने नाम?
मतलब एक राजा है। उसको दूसरा आदमी मारना चाहता है। वह महिला अपने बेटे को उसकी
जगह सुला देती है कि राजा को बचाना जरूरी है तो अपने बेटे का बलिदान दे देती है। चंदन
का बलिदान दे उदय सिंह को बचाते हैं। उदय सिंह महाराणा प्रताप के पिताजी हैं। कुछ दिन
यदि वहां उदय सिंह का बलिदान नहीं दिया तो महाराणा प्रताप पैदा नहीं हो पाए। पन्नाधाय
वो प्रातिस्मर्णीय महिला है तो राजस्थान इस मामले में बड़ा अलग रहा है।
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